मुड़मा जतरा जमीन विवाद और दुकानदारों से कथित चंदा वसूली पर सवाल उठाते देव कुमार धान

धान- 70 लाख रुपये सरकारी मदद, फिर दुकानदारों से वसूली क्यों?

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मुड़मा जतरा जमीन विवाद पर देव कुमार धान का सवाल, 70 लाख मिलते हैं तो दुकानदारों से चंदा क्यों?

बंधना तिग्गा और बंधु तिर्की पर साधा निशाना, कहा- मुड़मा जतरा मुंडा-उरांव की ऐतिहासिक धरोहर, यह सिर्फ एक गांव का मामला नहीं

प्रमुख बातें

  • मुड़मा जतरा की जमीन के विवाद पर देव कुमार धान ने सवाल उठाए।
  • बंधना तिग्गा से पूछा कि जमीन विवाद के समाधान के लिए मुख्यमंत्री और राजभवन को कितनी बार आवेदन दिया।
  • बंधु तिर्की के ग्रामसभा से विवाद सुलझाने वाले बयान पर भी प्रतिक्रिया दी।
  • आरोप लगाया कि ऐतिहासिक पड़हा जतरा को मेले में बदल दिया गया है और वहां चंदा वसूली हो रही है।
  • दावा किया कि सरकार मेले के आयोजन के लिए 70 लाख रुपये देती है, फिर दुकानदारों से पैसे क्यों लिए जाते हैं?

मुड़मा जतरा जमीन विवाद पर देव कुमार धान ने उठाए सवाल

रांची: मुड़मा जतरा की जमीन के विवाद को लेकर आदिवासी नेता देव कुमार धान ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आदिवासी धर्मगुरु बंधना तिग्गा से सवाल किया कि जब वे हर साल मुड़मा जतरा के आयोजन में प्रमुख रूप से शामिल होते हैं, तो उन्होंने अब तक जमीन विवाद के समाधान के लिए मुख्यमंत्री और राजभवन को कितनी बार आवेदन दिया है।
देव कुमार धान ने इस विवाद के समाधान के लिए किए गए प्रयासों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में ठोस पहल की जानकारी सामने आनी चाहिए।

बंधु तिर्की के बयान पर भी दी प्रतिक्रिया

देव कुमार धान ने पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि मुड़मा जतरा की जमीन के विवाद का समाधान ग्रामसभा करेगी।
इस पर देव कुमार धान ने कहा कि बंधु तिर्की को समझना चाहिए कि मुड़मा जतरा मुंडा और उरांव समुदाय की ऐतिहासिक धरोहर है। यह सिर्फ एक गांव का मामला नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज की विरासत से जुड़ा विषय है।

पड़हा जतरा को मेला बनाने पर उठाए सवाल

देव कुमार धान ने कहा कि पड़हा जतरा को मेले का रूप दे दिया गया है, जबकि वहां चंदा वसूली का खेल चल रहा है। उन्होंने जतरा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को लेकर चिंता जताई।
उनके अनुसार, मुड़मा जतरा को केवल मेले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि इसका संबंध आदिवासी समाज की परंपरा, पहचान और ऐतिहासिक विरासत से है।

सरकार 70 लाख रुपये देती है तो दुकानदारों से वसूली क्यों?

देव कुमार धान ने मुड़मा जतरा मेले के आयोजन में सरकारी राशि और दुकानदारों से कथित वसूली को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुड़मा जतरा को राजकीय मेला घोषित किया गया है और सरकार इसके आयोजन के लिए 70 लाख रुपये देती है।
उन्होंने सवाल किया कि जब सरकार आयोजन के लिए राशि उपलब्ध कराती है, तो फिर मेले में दुकान लगाने वाले दुकानदारों से चंदा या अन्य मदों में पैसे क्यों वसूले जाते हैं?
देव कुमार धान ने इस मामले में पारदर्शिता की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि सरकारी अनुदान मिलने के बावजूद दुकानदारों से पैसे लिए जाने के कारण स्पष्ट होने चाहिए।
नोट: दुकानदारों से कथित वसूली और 70 लाख रुपये के सरकारी अनुदान से संबंधित दावों की स्वतंत्र पुष्टि तथा आयोजन समिति या प्रशासन का पक्ष मिलने पर खबर को और तथ्यात्मक बनाया जा सकता है।

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