इमारत-ए-शरिया का S.I.R अभियान: जगन्नाथपुर में कार्यशाला का आयोजन.

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एसआईआर एवं पैरेंटल मैपिंग पर इमारत-ए-शरिया की महत्वपूर्ण कार्यशाला

जगन्नाथपुर (पश्चिमी सिंहभूम), झारखंडइमारत-ए-शरिया बिहार, ओडिशा एवं झारखंड की ओर से एसआईआर (Special Intensive Revision) और पैरेंटल मैपिंग से संबंधित व्यापक प्रशिक्षण अभियान के अंतर्गत पश्चिमी सिंहभूम ज़िले के जगन्नाथपुर स्थित मदरसा फ़ैज़-ए-आम में एक महत्वपूर्ण एवं लाभकारी कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की अध्यक्षता इमारत-ए-शरिया के सहायक नाज़िम मौलाना अहमद हुसैन क़ासमी ने की।

तिलावत-ए-क़ुरआन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यशाला का आरंभ प्रातः 9 बजे मदरसे के एक छात्र की प्रभावशाली तिलावत-ए-क़ुरआन और नात-ए-रसूल ﷺ से हुआ। कार्यक्रम का संचालन जमशेदपुर के नायब क़ाज़ी-ए-शरीअत मौलाना अफ़रोज़ सलीमी अल-क़ासमी ने किया।

एसआईआर के सामाजिक महत्व पर प्रकाश

प्रारंभिक संबोधन में क़ाज़ी-ए-शरीअत जमशेदपुर मौलाना सऊद आलम क़ासमी ने एसआईआर की आवश्यकता, उसके सामाजिक प्रभावों और जनभागीदारी की अहमियत पर विस्तार से चर्चा की।

वक़्फ़ संपत्तियों से संबंधित महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश

इमारत-ए-शरिया की रिसर्च टीम के सदस्य डॉ. हिफ़्ज़ुर्रहमान हफ़ीज़ ने वक़्फ़ से जुड़े अहम बिंदुओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि जिन पंजीकृत वक़्फ़ संपत्तियों का विवरण अब तक ‘उम्मीद पोर्टल’ पर अपलोड नहीं हो सका है, उनके लिए ट्रिब्यूनल में आवेदन कर समय रहते प्रक्रिया पूर्ण की जानी चाहिए।

प्रेज़ेंटेशन के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण

इसके पश्चात इमारत-ए-शरिया की रिसर्च टीम के सदस्य मुफ़्ती क़यामुद्दीन क़ासमी ने प्रोजेक्टर और प्रेज़ेंटेशन के माध्यम से पैरेंटल मैपिंग, फ़ॉर्म-6, फ़ॉर्म-8 तथा एसआईआर से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल और व्यवहारिक ढंग से समझाया। प्रतिभागियों ने इन विषयों पर प्रत्यक्ष अभ्यास भी किया।

क्षेत्रवार टीमों का गठन, युवाओं की सक्रिय भागीदारी

कार्यशाला के दौरान मौलाना इकरामुद्दीन क़ासमी और डॉ. हिफ़्ज़ुर्रहमान हफ़ीज़ ने विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों की टीमें गठित कीं, ताकि एसआईआर के दौरान आम नागरिकों की समस्याओं का संगठित समाधान किया जा सके। प्रश्नोत्तर सत्र में मुफ़्ती क़यामुद्दीन क़ासमी ने प्रतिभागियों के सवालों के संतोषजनक उत्तर दिए। बड़ी संख्या में युवाओं ने एसआईआर पूर्ण होने तक जनता की सहायता करने का संकल्प लिया।

अध्यक्षीय संबोधन: मानव सेवा पर विशेष ज़ोर

अपने अध्यक्षीय संबोधन में मौलाना अहमद हुसैन क़ासमी ने कहा कि समाज के गरीब और अशिक्षित वर्ग—चाहे वे किसी भी धर्म या समुदाय से हों—के लिए एसआईआर और पैरेंटल मैपिंग एक जटिल प्रक्रिया है, जबकि इसका सीधा संबंध नागरिक अधिकारों से है। उन्होंने हदीस-ए-नबवी ﷺ का हवाला देते हुए कहा कि सबसे उत्तम व्यक्ति वही है जो लोगों के लिए सबसे अधिक लाभकारी हो।

अमीर-ए-शरीअत की चिंता और दिशा-निर्देश

उन्होंने बताया कि झारखंड में चल रहे एसआईआर को लेकर मौलाना सैयद अहमद वली फ़ैसल रहमानी और नाज़िम इमारत-ए-शरिया मुफ़्ती मुहम्मद सईदुर्रहमान क़ासमी इस बात को लेकर विशेष रूप से चिंतित हैं कि कोई भी नागरिक इस प्रक्रिया से वंचित न रह जाए।

आयोजकों एवं गणमान्य लोगों के विचार

मदरसा फ़ैज़-ए-आम के नाज़िम मौलाना फ़िरोज़ आलम मज़ाहिरी ने इस जनहितकारी पहल की सराहना करते हुए इमारत-ए-शरिया, आयोजकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी तथा विभिन्न मिल्ली संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। इमारत-ए-शरिया के नक़ीब मास्टर अब्दुल मतीन और मास्टर इम्तियाज़ आलम ने इसे समय की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।

दुआ के साथ समापन, अगला पड़ाव सिमडेगा

कार्यक्रम का समापन ज़ुहर से पूर्व मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद ज़ाहिद क़ासमी (बड़बिल, ओडिशा) की दुआ पर हुआ। अंत में यह जानकारी दी गई कि झारखंड में एक माह तक चलने वाले इस प्रशिक्षण अभियान का अगला पड़ाव कल मग़रिब के बाद सिमडेगा के इस्लामपुर स्थित ज़मज़म मैरिज हॉल में आयोजित किया जाएगा।

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