नई शिक्षा नीति में भेदभाव हुआ तो सड़क पर उतरेगा मोर्चा, रांची में आंदोलन की चेतावनी
प्रमुख बातें
- नई शिक्षा नीति 2020 के तहत चयन प्रक्रिया में भेदभाव का आरोप
- वित्त रहित इंटर कॉलेज और उच्च विद्यालयों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
- 20 मई को जैक अध्यक्ष और शिक्षा सचिव को सौंपा जाएगा ज्ञापन
- जरूरत पड़ने पर हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करने की चेतावनी
- 10 हजार शिक्षक-कर्मचारियों के सड़क पर उतरने का ऐलान
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नई शिक्षा नीति को लेकर मोर्चा का सरकार पर हमला
रांची- नई शिक्षा नीति 2020 के तहत इंटर कॉलेज एवं उच्च विद्यालयों के चयन में भेदभाव किए जाने का आरोप लगाते हुए वित्त रहित शिक्षण संस्थाओं के मोर्चा ने सरकार के खिलाफ जोरदार आंदोलन की चेतावनी दी है। मोर्चा ने कहा कि यदि चयन प्रक्रिया में वित्त रहित संस्थाओं की अनदेखी की गई तो रांची की सड़कों पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

मोर्चा के नेताओं ने कहा कि राज्य सरकार नई शिक्षा नीति के तहत अनुदानित इंटर कॉलेजों एवं उच्च विद्यालयों में कक्षा 9वीं से 12वीं तक पढ़ाई शुरू करने के लिए कमेटी बनाकर प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। सरकारी विद्यालयों के लिए मानक तय कर जिला शिक्षा पदाधिकारियों से प्रतिवेदन भी मांगा गया है, जबकि वित्त रहित संस्थाओं की बैठक 19 मई 2026 को बुलाई गई है। इसे मोर्चा ने शुरुआत से ही भेदभाव करार दिया है।
“सभी मानकों को पूरा करते हैं वित्त रहित संस्थान”
मोर्चा का कहना है कि राज्य में करीब 600 प्रस्वीकृत संस्थाएं हैं, जिन्हें सरकार से अनुदान मिलता है और ये सभी संस्थान राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करते हैं। इन संस्थानों में भूमि, भवन, प्रयोगशाला, लाइब्रेरी और अन्य आधारभूत संरचनाएं वर्षों से उपलब्ध हैं।
बैठक में वक्ताओं ने सवाल उठाया कि जिन नए प्लस-टू विद्यालयों का उत्क्रमण किया जा रहा है, वहां न पर्याप्त भवन हैं, न शिक्षक और न ही बुनियादी सुविधाएं। ऐसे में चयन प्रक्रिया में वित्त रहित संस्थाओं को नजरअंदाज करना अनुचित होगा।

जैक बोर्ड सदस्यों को हटाने की मांग
मोर्चा ने जैक बोर्ड पर भी गंभीर सवाल उठाए। नेताओं ने कहा कि जैक द्वारा गठित शासी निकाय में कई सदस्यों को एक साथ कई संस्थानों का परिषद प्रतिनिधि बनाया गया है, जो अधिनियम एवं नियमावली के विपरीत है।
मोर्चा ने कहा कि जैक बोर्ड सदस्यों का कार्यकाल 15 मई 2026 को समाप्त हो चुका है, इसलिए उन्हें संस्थाओं के शासी निकाय से तत्काल हटाया जाए। ऐसा नहीं होने पर जैक कार्यालय का घेराव किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर उच्च न्यायालय में रिट याचिका भी दायर की जाएगी।
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20 मई को ज्ञापन, फिर लोक भवन पर महाधरना
मोर्चा ने घोषणा की कि 20 मई को जैक अध्यक्ष और शिक्षा सचिव को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद राज्यपाल के समक्ष लोक भवन पर महाधरना आयोजित किया जाएगा। आंदोलन की आगे की रणनीति तय करने के लिए 21 मई को अध्यक्ष मंडल की बैठक बुलाई गई है।
वहीं 25 मई को राज्य के वित्त रहित इंटर कॉलेज, उच्च विद्यालय, संस्कृत एवं मदरसा विद्यालयों के प्राचार्यों, शिक्षक प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों की बड़ी बैठक आयोजित होगी।
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“एक भी संस्था छूटी तो 10 हजार शिक्षक उतरेंगे सड़क पर”
बैठक में चेतावनी दी गई कि यदि नई शिक्षा नीति लागू करने में एक भी वित्त रहित संस्था को बाहर रखा गया तो राज्य के 10 हजार शिक्षक एवं कर्मचारी सड़क पर उतरेंगे। इसकी घोषणा बैठक में रघुनाथ जी ने की।
75 प्रतिशत अनुदान वृद्धि की भी उठी मांग
मोर्चा ने सरकार से 75 प्रतिशत अनुदान वृद्धि की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की मांग भी की। नेताओं ने कहा कि सरकार ने विधानसभा में इस वित्तीय वर्ष में 75 प्रतिशत अनुदान देने का आश्वासन दिया था, लेकिन जिला स्तर पर जांच प्रक्रिया धीमी है।
मोर्चा ने सरकार से जल्द जांच प्रतिवेदन मंगाकर अनुदान वृद्धि का रास्ता साफ करने की मांग की।
बड़ी संख्या में शिक्षक प्रतिनिधि हुए शामिल
बैठक में राज्यभर से 500 से अधिक प्राचार्य, प्रधानाचार्य और शिक्षक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक को अरविंद सिंह, देवनाथ सिंह, फजलुल कदीर अहमद, डालेश चौधरी, मनीष कुमार, नरोत्तम सिंह, चंदेश्वर पाठक, उदय यादव, संजय कुमार, कुंदन कुमार सिंह और हरिहर प्रसाद कुशवाहा समेत कई वक्ताओं ने संबोधित किया।
बैठक की अध्यक्षता गणेश महतो ने की, जबकि मंच संचालन अरविंद सिंह ने किया।
