EVEREST पर JMM: 5,364 मीटर की ऊंचाई से कुणाल षाडंगी का संदेश, कठिन हालात में रचा नया उदाहरण
-20 डिग्री तापमान और कम ऑक्सीजन के बीच पूरा किया मिशन
झारखंड की राजनीति से एक अलग और प्रेरणादायक खबर सामने आई है।
झामुमो नेता कुणाल षाडंगी ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप (5,364 मीटर) तक पहुंचकर एक खास संदेश दिया है।
यह यात्रा बेहद चुनौतीपूर्ण रही।
तापमान -20 डिग्री तक गिर गया, जबकि ऑक्सीजन समुद्र तल की तुलना में लगभग 50-60 प्रतिशत ही उपलब्ध थी। इसके बावजूद उन्होंने लगातार आठ दिनों तक रोजाना 8 से 9 घंटे ट्रैकिंग कर यह मुकाम हासिल किया।
एवरेस्ट बेस कैंप पर लहराया झामुमो का झंडा
एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचने के बाद कुणाल षाडंगी ने तिरंगे के साथ झामुमो का झंडा भी लहराया।
यह पल न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि रहा, बल्कि झारखंड और पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए भी गर्व का क्षण बन गया।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए भेजा विशेष संदेश
एवरेस्ट बेस कैंप से कुणाल षाडंगी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झामुमो कार्यकर्ताओं के लिए एक संदेश भी साझा किया।
उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ते रहने का संदेश दिया और इसे जीवन का सबसे बड़ा सबक बताया।
पशुपतिनाथ मंदिर से हुई यात्रा की शुरुआत
इस कठिन अभियान की शुरुआत नेपाल के काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ हुई।
इसके बाद टीम ने लुक्ला, फाकडिंग, नामचे बाजार, डिंगबोचे, लाबोचे और गोरक्षेप होते हुए एवरेस्ट बेस कैंप तक का सफर तय किया।

संघर्ष, थकान और सीख
यात्रा के दौरान कई बार थकान, सांस लेने में कठिनाई और नेटवर्क की कमी जैसी चुनौतियां सामने आईं।
फिर भी एक स्पष्ट लक्ष्य ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
उनके अनुसार यह सिर्फ एक ट्रेक नहीं, बल्कि जीवन का एक महत्वपूर्ण अनुभव और सीख है कि कठिन परिस्थितियों में भी रुकना नहीं चाहिए।
परिवार और साथियों का मिला समर्थन
कुणाल षाडंगी ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, अपने परिवार, दोस्तों और झामुमो कार्यकर्ताओं को दिया।
साथ ही गाइड और सहयोगी टीम के प्रति भी आभार व्यक्त किया।
