सर्वे में सामने आई जमीनी हकीकत
भोजन का अधिकार अभियान, झारखंड द्वारा नवंबर-दिसंबर 2025 में 9 जिलों के 15 प्रखंडों में 106 आंगनवाड़ी केंद्रों का सर्वे किया गया। इसमें सेविकाओं से बातचीत के जरिए पोषण योजनाओं की वास्तविक स्थिति सामने आई।
अंडा वितरण में गड़बड़ी, सेविकाओं पर आर्थिक बोझ
राज्य में सप्ताह में 6 दिन अंडा देने की नीति है, लेकिन केवल 43% केंद्र ही इसका पालन कर पा रहे हैं।
कम सरकारी दर और भुगतान में देरी के कारण सेविकाओं को अपनी जेब से खर्च करना पड़ रहा है, जिससे कई जगह अंडा वितरण बंद हो गया है।
हालांकि 97% सेविकाओं ने माना कि अंडा मिलने पर बच्चों की उपस्थिति बढ़ती है।
e-KYC में तकनीकी बाधाएं
- केवल 56.1% लाभार्थियों का e-KYC पूरा
- 92% सेविकाओं ने OTP देरी की शिकायत की
- बायोमेट्रिक और आधार त्रुटियों से कई पात्र लोग वंचित
FRS और THR प्रणाली पूरी तरह फेल
- 87% केंद्रों में THR वितरण नहीं हुआ
- 86% सेविकाओं ने नेटवर्क समस्या बताई
- 41.5% मामलों में चेहरा पहचान विफल
- 73.6% ने कहा काम और मुश्किल हुआ
- 52% सेविकाएं FRS बंद करने के पक्ष में
कई मामलों में तकनीकी विफलता के कारण महिलाओं और बच्चों को पोषण नहीं मिल पा रहा
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नेटवर्क की कमी बनी बड़ी बाधा
RTI के अनुसार झारखंड के 575 गांव आज भी नेटवर्क से वंचित हैं, जहां पोषण सेवाएं सबसे ज्यादा जरूरी हैं।
सेविकाओं पर बढ़ता दबाव और दोहरा काम
सेविकाओं को पोषण ट्रैकर के साथ-साथ BLO का अतिरिक्त काम भी दिया जा रहा है, जिससे उन पर काम का दबाव और बढ़ गया है।
अभियान की मुख्य मांगें
- THR आपूर्ति तुरंत बहाल की जाए
- FRS और e-KYC विफलता पर पोषण रोकना बंद हो
- FRS प्रणाली तत्काल बंद की जाए
- सेविकाओं को अग्रिम भुगतान दिया जाए
- तकनीकी समस्याओं के लिए सेविकाओं को जिम्मेदार न ठहराया जाए
- आंगनवाड़ी केंद्रों की बुनियादी सुविधाएं सुधारी जाएं
प्रेस वार्ता में शामिल लोग
तारामणि साहू, सरिता एक्का, बुद्धि देवी, विवेक गुप्ता, अफजल अनीश, जेम्स हेरेंज, मनीषा दिग्गी, ज्यां द्रेज, सुगिया देवी और नन्हकु सिंह
चेतावनी
अभियान ने कहा कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर महिलाओं और बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य पर पड़ेगा।
