सरहुल पर्व की परंपरा बनाए रखने के लिए 15 करोड़ के मांदर-नगाड़े वितरित होंगे.

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मुख्य बिंदु:

✔️ कांके मायापुर सरना स्थल में 29वां सरहुल पूजा महोत्सव का आयोजन
✔️ मंत्री चमरा लिंडा ने आदिवासी संस्कृति संरक्षण पर दिया जोर
✔️ आदिवासी समाज के उत्थान के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं की घोषणा
✔️ सरहुल पर्व की मूल परंपरा बनाए रखने के लिए 15 करोड़ रुपये के मांदर-नगाड़े वितरित
✔️ सरना कोड की मान्यता के लिए आंदोलन जारी रखने की चेतावनी


रांची में पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया सरहुल महोत्सव

झारखंड में आदिवासी समुदाय द्वारा पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ सरहुल महोत्सव मनाया जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार को कांके मायापुर सरना स्थल में आदिवासी 22 पड़ाहा सरना समिति ओरमांझी-कांके द्वारा 29वां सरहुल पूजा महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस मौके पर अनुचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के मंत्री चमरा लिंडा ने शिरकत की और आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को संरक्षित करने पर बल दिया।

आदिवासी संस्कृति को संरक्षित करने का आह्वान

मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि आदिवासी संस्कृति को बचाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरहुल महोत्सव में पारंपरिक मांदर और नगाड़े की धुनों पर नृत्य करना चाहिए, न कि आधुनिक डीजे और फिल्मी गीतों पर। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “हमारा मंत्रालय आदिवासी कल्याण के लिए कार्यरत है और हम समाज को शिक्षित एवं सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

आदिवासी समाज के विकास हेतु योजनाएं

मंत्री चमरा लिंडा ने आदिवासी समुदाय के उत्थान के लिए कई योजनाओं की घोषणा की:
✔️ आदिवासी एवं ओबीसी समुदाय को आगे बढ़ाने के लिए स्कूल, ट्यूशन सेंटर, कॉलेज और अस्पताल खोले जाएंगे।
✔️ हरिजन समुदाय के लिए भी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
✔️ छोटानागपुर क्षेत्र में सभी सरना स्थलों की बाउंड्री निर्माण के लिए सरकार कार्य करेगी।

मांदर-नगाड़ा और सरहुल राग के संरक्षण का संकल्प

मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि सरहुल पर्व की मूल आत्मा को जीवंत बनाए रखने के लिए सरकार ने 15 करोड़ रुपये के मांदर-नगाड़े वितरित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि सरहुल महोत्सव सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है और इसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।

सरना कोड के लिए आंदोलन जारी रहेगा

सरना धर्म को संवैधानिक मान्यता दिलाने के संघर्ष पर जोर देते हुए मंत्री लिंडा ने कहा, “जब तक हम संघर्ष करते रहेंगे, तब तक अपनी संस्कृति को बचा पाएंगे। अगर केंद्र सरकार सरना कोड नहीं देती है, तो हम सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।”

उन्होंने आगे कहा कि “यदि आवश्यक हुआ, तो संपूर्ण राज्य को बंद करने के लिए भी तैयार रहेंगे।” उन्होंने समाज के सभी लोगों से एकजुट होकर आंदोलन को समर्थन देने की अपील की और कहा, “संघर्ष ही जीवन है। हमें साथ मिलकर लड़ना होगा और अपने अधिकार प्राप्त करने होंगे।”

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