राज्य में 404 स्कूलों को अनुदान स्वीकृत
अनुदान प्राप्त करने वाले विद्यालयों की संख्या
वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य के कुल 404 इंटर कॉलेज, उच्च विद्यालय, संस्कृत विद्यालय एवं मदरसा विद्यालयों को अनुदान की राशि स्वीकृत की गई है। इनमें शामिल हैं:
- 137 इंटर कॉलेज
- 211 उच्च विद्यालय
- 30 संस्कृत विद्यालय
- 26 मदरसा विद्यालय
अनुदान के लिए किए गए आवेदन
अनुदान प्राप्त करने के लिए कुल 169 इंटर कॉलेज, 309 उच्च विद्यालय, 35 संस्कृत विद्यालय एवं 35 मदरसा विद्यालयों ने ऑफलाइन आवेदन किया था।
अस्वीकृत किए गए आवेदन
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने अनुदान राशि स्वीकृति के बाद 144 आवेदन अस्वीकृत कर दिए, जिनमें शामिल हैं:
- 98 उच्च विद्यालय
- 32 इंटर कॉलेज
- 9 मदरसा विद्यालय
- 5 संस्कृत विद्यालय
अनुदान राशि का वितरण
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने स्वीकृत अनुदान की राशि से संबंधित कागजात सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को भेज दिए थे। 29 मार्च की संध्या 8:00 बजे तक सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों ने बिल बनाकर क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक से हस्ताक्षर करवा कर बिल जिला कोषागार को भेज दिया था। इसके बाद, जिला कोषागार ने रात तक सभी संस्थाओं के खाते में अनुदान राशि भेज दी। किसी भी जिले में किसी भी संस्था की राशि लैप्स नहीं हुई।
अनुदान की पहली किस्त का प्रतिशत
वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्वीकृत अनुदान राशि की पहली किस्त का 88% भाग भेजा गया है, जबकि शेष 12% राशि अगले वित्तीय वर्ष में भेजी जाएगी।
पूरी राशि न भेजे जाने के कारण
स्वीकृत अनुदान राशि 89 करोड़ रुपये थी, लेकिन विभाग के पास मात्र 72 करोड़ रुपये उपलब्ध थे, जिसके कारण शत-प्रतिशत राशि का वितरण संभव नहीं हो सका।
राशि आवंटन में गड़बड़ी
अनुदान राशि आवंटन में गड़बड़ी के कारण 8 से 9 करोड़ रुपये की राशि रांची, हजारीबाग, धनबाद और बोकारो जिले में चली गई। यह राशि 29 मार्च की रात 12:00 बजे लैप्स हो गई। यदि यह राशि सही तरीके से आवंटित होती, तो 404 संस्थाओं को 100% अनुदान प्राप्त हो जाता।
गड़बड़ी का प्रभाव
कुछ संस्थानों को अनुदान की निर्धारित राशि से कई गुना अधिक मिल गई, उदाहरण के लिए:
- 7,20,000 रुपये की जगह 72 लाख रुपये गए।
- 9,60,000 रुपये की जगह 96 लाख रुपये गए।
- 30 लाख रुपये की जगह 3 करोड़ रुपये भेजे गए।
यह गड़बड़ी अंतिम समय में आवंटन में जल्दबाजी और एक अतिरिक्त शून्य जुड़ जाने के कारण हुई। यदि आवंटन सावधानीपूर्वक किया जाता, तो यह गलती नहीं होती।
लैप्स हुई राशि का विवरण
- हजारीबाग: 4 करोड़ रुपये
- रांची: 1 करोड़ 92 लाख रुपये
- धनबाद एवं बोकारो: 2 करोड़ से अधिक
यदि यह राशि बची रहती, तो सभी संस्थानों को 100% अनुदान मिल सकता था।
नेताओं की प्रतिक्रिया
मोर्चा के कुंदन कुमार सिंह, रघुनाथ सिंह, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, फजलुल कादरी अहमद, मनीष कुमार, गणेश महतो, रेशमा बेक, मनोज तिर्की, अरविंद सिंह, देवनाथ सिंह, चंदेश्वर पाठक, संजय कुमार, नरोत्तम सिंह, रघु विश्वकर्मा, बिरसो उरांव एवं रणजीत मिश्रा ने कहा कि यदि अनुदान समिति समय पर बैठक कर वितरण कर देती, तो 8 से 9 करोड़ रुपये लैप्स नहीं होते और सभी संस्थानों को पूरी राशि मिलती।
नियमों का उल्लंघन
- परिषद की स्वीकृति के बावजूद छात्र संख्या में कटौती की गई।
- 50 स्कूलों को विज्ञप्ति और ऑफलाइन आवेदन के बावजूद अनुदान से वंचित किया गया।
- शासी निकाय के नाम पर दो दर्जन से अधिक स्कूलों एवं इंटर कॉलेजों के अनुदान अस्वीकृत किए गए।
- नियमानुसार योग्य होने के बावजूद कई इंटर कॉलेज और उच्च विद्यालयों को अनुदान नहीं मिला।
न्याय की मांग
मोर्चा जल्द ही शिक्षा सचिव से मिलकर ज्ञापन सौंपेगा और न्याय की मांग करेगा। यदि आवश्यक हुआ, तो मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री को भी ज्ञापन दिया जाएगा। यदि फिर भी न्याय नहीं मिला, तो संघर्ष किया जाएगा।
प्रेस को जानकारी
इस संबंध में प्रेस को जानकारी मनीष कुमार और अरविंद सिंह ने दी।
