जनगणना 2026 से पहले सरना धर्म पर बड़ा विमर्श

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आदिवासी/सरना धर्म को अलग कोड देने की मांग तेज

झारखण्ड में आदिवासी समुदाय की धार्मिक पहचान को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर आवाज बुलंद हुई है। मुख्यमंत्री Hemant Soren ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल को पत्र लिखकर आगामी जनगणना के दूसरे चरण में आदिवासी/सरना धर्म (या अन्य समरूप धार्मिक व्यवस्थाओं) को अलग कोड देने की मांग की है।

जनभावनाओं और विधानसभा संकल्प का हवाला
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि यह मांग केवल राजनीतिक नहीं बल्कि राज्य की व्यापक जनभावनाओं से जुड़ी हुई है। उन्होंने झारखण्ड विधानसभा द्वारा पारित संकल्प का भी उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार पहले ही इस विषय पर अपनी स्पष्ट राय व्यक्त कर चुकी है।

सांस्कृतिक अस्मिता के संरक्षण पर जोर
पत्र में आदिवासी समाज की सांस्कृतिक और धार्मिक अस्मिता को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरना धर्म की अपनी विशिष्ट परंपराएं, रीति-रिवाज और जीवन शैली है, जिसे अलग पहचान मिलना आवश्यक है।

केंद्र से सकारात्मक पहल की अपेक्षा
मुख्यमंत्री ने माननीय राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से इस विषय पर सकारात्मक पहल करने और आवश्यक अनुशंसा करने का अनुरोध किया है, ताकि आगामी जनगणना में इस मांग को शामिल किया जा सके।

सामाजिक संगठनों का समर्थन
राज्य के विभिन्न आदिवासी संगठनों और सामाजिक समूहों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि अलग धार्मिक कोड मिलने से आदिवासी समाज की वास्तविक संख्या और पहचान सामने आएगी, जिससे नीतिगत फैसलों में भी मदद मिलेगी।

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