वेतन नहीं मिलने से शिक्षकों की हालत खराब
झारखंड में प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के शिक्षक इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। रांची जिले के करीब 4200 शिक्षकों को पिछले दो महीनों (मार्च और अप्रैल) से वेतन नहीं मिला है। इसके कारण शिक्षक रोजमर्रा के खर्च, बच्चों की फीस, लोन की ईएमआई और दवाइयों तक का खर्च उठाने में असमर्थ हो रहे हैं।
कई जिलों में फैली समस्या
यह समस्या केवल रांची तक सीमित नहीं है, बल्कि लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, रामगढ़ और जमशेदपुर समेत कई जिलों के शिक्षक भी इससे प्रभावित हैं। स्कूलों में शिक्षा देने वाले शिक्षक खुद आर्थिक तंगी और अनिश्चित भविष्य से जूझ रहे हैं।
तकनीकी कारण बना सबसे बड़ा रोड़ा
वेतन भुगतान नहीं होने के पीछे मुख्य वजह तकनीकी बताई जा रही है। ट्रेजरी अधिकारियों के अनुसार, DDO पोर्टल पर शिक्षकों का डेटा अपडेट नहीं है। वहीं, वित्त विभाग द्वारा पोर्टल फ्रीज कर दिए जाने के कारण आवश्यक जानकारी अपडेट करना संभव नहीं हो पा रहा है, जिससे फाइलें लंबित हैं।
निजी जीवन पर गहरा असर
वेतन नहीं मिलने का असर शिक्षकों के निजी जीवन पर भी साफ दिख रहा है। बैंक लोन की किश्तें बाउंस हो रही हैं, जिससे बैंक कर्मियों के फोन और मानसिक दबाव बढ़ रहा है। बिजली बिल, बच्चों की फीस और अन्य जरूरी खर्च पूरे करना शिक्षकों के लिए चुनौती बन गया है।
शिक्षक संघ ने उठाई आवाज
अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि जांच या तकनीकी खामियों के नाम पर वेतन रोकना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षक लगातार अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकला है।
प्रशासनिक दावों पर सवाल
संघ के अनुसार, कई प्रखंडों से बिल जमा होने के बावजूद उनका भुगतान नहीं हो रहा है। जिला कोषागार स्तर पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है और आश्वासनों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
निष्कर्ष
झारखंड में शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले शिक्षक आज खुद आर्थिक असुरक्षा से जूझ रहे हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह समस्या व्यापक आंदोलन का रूप ले सकती है।
