झारखंड में CM की पकड़ कमजोर? सुदेश महतो ने उठाए बड़े सवाल, JPSC-JSSC से लेकर मुख्य सचिव तक घेरा
रांची। आजसू पार्टी के सुप्रीमो सुदेश कुमार महतो ने झारखंड की मौजूदा शासन व्यवस्था और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या मुख्यमंत्री अप्रासंगिक हो गए हैं और क्या राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं कमजोर पड़ रही हैं?
महतो ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू को मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय नहीं मिलने से लेकर JPSC-JSSC मामले में सीआईडी की कार्रवाई तक कई मुद्दे उठाए हैं। हालांकि, उनके पोस्ट में लगाए गए आरोपों और उठाए गए सवालों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
प्रमुख बातें
- सुदेश महतो ने मुख्यमंत्री की शासन पर पकड़ को लेकर सवाल उठाए।
- नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू को मुख्यमंत्री से समय नहीं मिलने का मुद्दा उठाया।
- प्रतिनिधिमंडल द्वारा मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपे जाने पर सवाल खड़े किए।
- कांग्रेस और झामुमो के प्रतिनिधिमंडलों द्वारा भी मुख्य सचिव को ज्ञापन दिए जाने का दावा।
- JPSC-JSSC मामले में सीआईडी की कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
- मुख्य सचिव के गोपनीय कार्यालय से एक सरकारी कर्मी की गिरफ्तारी का जिक्र किया।
- मुख्यमंत्री और नौकरशाही के बीच संबंधों को लेकर कई सवाल उठाए।
‘क्या मुख्यमंत्री अप्रासंगिक हो गए हैं?’
सुदेश महतो ने सीधे सवाल किया कि क्या राज्य के मुख्यमंत्री अब अप्रासंगिक हो गए हैं? उन्होंने पूछा कि क्या झारखंड में लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं ध्वस्त हो रही हैं और क्या सरकार का राजनीतिक नेतृत्व विफल हो गया है।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री द्वारा की गई कथित शासकीय गलतियों या लिए गए निर्णयों को लेकर कुछ वर्तमान एवं पूर्व वरीय नौकरशाह उन पर दबाव या ब्लैकमेल कर रहे हैं।
महतो ने यह भी सवाल किया कि आखिर शासन पर मुख्यमंत्री की पकड़ कितनी मजबूत है।
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मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं मिलने पर उठाए सवाल
आजसू प्रमुख ने अपने पोस्ट में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री से समय नहीं मिलने के कारण उन्हें अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन मुख्य सचिव को सौंपना पड़ा।
उनके मुताबिक, नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल से मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री के कॉन्फ्रेंस हॉल में ही ज्ञापन लिया।
सुदेश महतो ने एक अपुष्ट सूचना का भी उल्लेख किया है, जिसके अनुसार प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान मुख्य सचिव मुख्यमंत्री के लिए निर्धारित कुर्सी पर बैठे थे। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सरकार में शामिल दलों को लेकर भी सवाल
सुदेश महतो ने दावा किया कि मामला केवल विपक्ष तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार में शामिल कांग्रेस और झामुमो के प्रतिनिधिमंडल भी अपनी कुछ मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के बजाय मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंप रहे हैं।
इसी आधार पर उन्होंने सवाल किया कि आखिर मुख्यमंत्री अपने राजनीतिक सहयोगियों और सरकार में शामिल दलों के प्रतिनिधिमंडलों से मिलने में क्यों असहज महसूस कर रहे हैं।
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JPSC-JSSC मामले को लेकर भी सरकार पर निशाना
आजसू प्रमुख ने JPSC और JSSC से जुड़े कथित घोटालों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन मांगों पर कार्रवाई के लिए मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपे गए हैं, उसी मुख्य सचिव के गोपनीय कार्यालय से एक सरकारी कर्मी को सीआईडी ने गिरफ्तार किया है।
सुदेश महतो ने सवाल किया कि गिरफ्तार सरकारी कर्मी ने जांच एजेंसी के सामने क्या-क्या खुलासे किए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता सीआईडी से इन तथ्यों की जानकारी जानना चाहती है।
‘व्यवस्था में व्याप्त अव्यवस्था त्रासदी से कम नहीं’
सुदेश महतो ने पूरे घटनाक्रम को लेकर कहा कि व्यवस्था में व्याप्त यह अव्यवस्था किसी त्रासदी से कम नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि मुख्यमंत्री अपने राजनीतिक सहयोगियों, विपक्षी दल के प्रतिनिधियों और सरकार में शामिल दलों के प्रतिनिधिमंडलों से मिलने से क्यों बच रहे हैं।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि नेता प्रतिपक्ष को मुख्यमंत्री से मिलने का समय नहीं दिया जाना और उन्हें अपने विधायकों के साथ मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपने के लिए बाध्य होना आखिर किस ओर संकेत करता है।
मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर बढ़ा राजनीतिक हमला
सुदेश महतो के इस बयान के बाद झारखंड की राजनीति में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कार्यशैली और सरकार के प्रशासनिक संचालन को लेकर बहस तेज होने की संभावना है। हालांकि, उनके द्वारा उठाए गए कई सवाल राजनीतिक आरोपों और दावों पर आधारित हैं, जिन पर मुख्यमंत्री कार्यालय, राज्य सरकार या संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
