वित्त रहित संस्थानों को बंद करने की साजिश नहीं सहेगा मोर्चा, हजारों शिक्षक उतरेंगे सड़कों पर.

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मुख्य बिंदु

1. सत्र विस्तार और सीट वृद्धि पर रोक के खिलाफ शिक्षक मोर्चा का बड़ा ऐलान

2. एक भी संस्था बंद हुई तो हजारों शिक्षक रांची की सड़कों पर उतरेंगे

3. जैक को सत्र विस्तार और सीट वृद्धि का पूर्ण कानूनी अधिकार – मोर्चा

4. 5 अगस्त को विधानसभा के सामने महाधरना, 30 जुलाई को रणनीतिक बैठक

5. शिक्षा को वित्तीय भार से जोड़ना असंवैधानिक और गरीब छात्रों के साथ अन्याय – मोर्चा



रांची, 28 जुलाई 2025
राज्य के वित्त रहित स्कूलों और इंटर कॉलेजों में सत्र विस्तार और सीट वृद्धि पर रोक लगाने की हालिया विभागीय पहल के खिलाफ झारखंड वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने मोर्चा खोल दिया है। मोर्चा ने साफ कर दिया है कि अगर इस आधार पर किसी भी संस्थान को बंद करने या परेशान करने की कोशिश हुई तो हजारों शिक्षक रांची की सड़कों पर उतरेंगे और सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन करेंगे।

मोर्चा के वरिष्ठ पदाधिकारी प्रकाश नाथ ने प्रेस को संबोधित करते हुए विभागीय सचिव द्वारा जैक को लिखे गए पत्र पर कड़ा ऐतराज जताया, जिसमें सत्र विस्तार और इंटर कॉलेजों में 512 सीटों से अधिक नामांकन की मनाही की बात कही गई थी।

जैक की स्वायत्तता और नियमावली का हवाला

मोर्चा का दावा है कि जैक एक ऑटोनॉमस बोर्ड है जिसे झारखंड अधिविध परिषद अधिनियम 2002 और संशोधित अधिनियम 2006 के तहत स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अधिकार है। 2016 में हुई बैठक का हवाला देते हुए बताया गया कि जैक को सत्र विस्तार करने और सीट वृद्धि का अधिकार नियमावली के तहत प्राप्त है।

साथ ही मोर्चा ने यह भी कहा कि स्थापना अनुमति के मामले में 2005 और 2006 की नियमावली में कहीं भी दो वर्षों तक सीमित रखने का उल्लेख नहीं है, बल्कि कुछ शर्तें पूरी होने के बाद स्थायी प्रस्वीकृति देने की बात कही गई है। ऐसे में जैक द्वारा 2 वर्ष की सीमित अवधि तय करना नियम के खिलाफ है।

उच्च न्यायालय का हवाला और पुरानी मिसालें

इंटरमीडिएट कॉलेज में सीट वृद्धि के मामले में 2024 में B.S इंटर कॉलेज, पाटन, पलामू द्वारा दायर याचिका (WPC/4556/2024) में माननीय उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि जैक के पास 512 सीट से अधिक सीट वृद्धि का अधिकार है, बशर्ते उचित जांच और बुनियादी ढांचे की समीक्षा हो।

पूर्व में भी जैक ने 384 सीटों के अतिरिक्त प्रत्येक संकाय में 128 सीटों की वृद्धि की थी, जिसे इस वर्ष भी बरकरार रखा गया है।

वित्तीय भार से शिक्षा को न जोड़ने की अपील

मोर्चा ने सरकार के उस तर्क को खारिज किया जिसमें अतिरिक्त सीटों को वित्तीय भार से जोड़कर रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को लोकतांत्रिक देश में वित्तीय भार से जोड़ना न केवल अव्यावहारिक है बल्कि असंवैधानिक भी है। गरीब, ग्रामीण और आदिवासी तबके के बच्चे इन्हीं संस्थानों से पढ़कर आगे बढ़ते हैं और ऐसे में सीटों में कटौती उन्हें शिक्षा से वंचित करने जैसा है।

मोर्चा का ऐलान: आंदोलन तय, महाधरना 5 अगस्त को

आज हुई आपात बैठक में मोर्चा ने निर्णय लिया कि अगर सरकार ने सत्र विस्तार या सीट वृद्धि पर रोक लगाने के निर्णय में बदलाव नहीं किया तो 30 जुलाई को वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाकर आगामी आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।

मोर्चा पहले ही 5 अगस्त को विधानसभा के सामने महाधरना का ऐलान कर चुका है, जिसमें अब सत्र विस्तार और सीट वृद्धि के मुद्दे भी जोड़े जाएंगे। साथ ही 75% अनुदान वृद्धि की संचिका को मंत्रिपरिषद में नहीं रखने के विरोध में भी प्रदर्शन किया जाएगा।

बैठक में उपस्थित रहे मोर्चा के वरिष्ठ पदाधिकारी

आज की बैठक में कुंदन कुमार सिंह, रघुनाथ सिंह, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, फजलुल कदीर अहमद, गणेश महतो, अरविंद सिंह, मनीष कुमार, नरोत्तम सिंह, डॉ. देवनाथ सिंह, रेशमा बेक, मनोज तिर्की, पशुपति महतो, संजय कुमार, मुरारी प्रसाद सिंह, बिरसो उरांव, मनोज कुमार, चंदेश्वर पाठक समेत कई प्रमुख नेता मौजूद थे।
बैठक के निर्णय की जानकारी प्रेस को मनीष कुमार, अरविंद सिंह और मुरारी सिंह ने दी।

 

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