हूल दिवस कार्यक्रम में संबोधित करते पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन

घुसपैठ पर गरजे चंपाई, सरकार को घेरा, 15 हजार एकड़ जमीन का किया जिक्र

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15 हजार एकड़ जमीन पर कब्जे का दावा, चंपाई सोरेन के बयान से झारखंड की राजनीति गरमाई

रांची: पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने हूल दिवस के अवसर पर दुमका में आयोजित कार्यक्रम के दौरान झारखंड में कथित घुसपैठ और आदिवासी जमीन पर कब्जे को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकुड़ जिले में आदिवासियों और मूलवासियों की 15 हजार एकड़ से अधिक जमीन पर बांग्लादेशी घुसपैठियों का कब्जा है। साथ ही उन्होंने कहा कि दुमका, साहेबगंज और गिरिडीह सहित कई जिलों में भी ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है। चंपाई सोरेन के इस बयान के बाद राज्य में घुसपैठ और भूमि सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

प्रमुख बातें

  • चंपाई सोरेन ने पाकुड़ में 15 हजार एकड़ जमीन पर कथित कब्जे का दावा किया।
  • हूल दिवस कार्यक्रम में सरकार पर साधा निशाना।
  • दुमका, साहेबगंज और गिरिडीह का भी किया उल्लेख।
  • घुसपैठ रोकने के लिए बड़े जन-आंदोलन की बात कही।
  • बयान के बाद झारखंड में राजनीतिक बहस तेज।

हूल दिवस कार्यक्रम में चंपाई सोरेन का बड़ा दावा

दुमका में आयोजित हूल दिवस समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने कहा कि पाकुड़ जिले में आदिवासियों और मूलवासियों की 15 हजार एकड़ से अधिक जमीन पर बांग्लादेशी घुसपैठियों का कब्जा है। उन्होंने दावा किया कि ऐसी स्थिति केवल पाकुड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि दुमका, साहेबगंज और गिरिडीह जैसे जिलों में भी देखने को मिल रही है।

सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

चंपाई सोरेन ने आरोप लगाया कि कथित घुसपैठ सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर रही है और सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखा रही है। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए व्यापक जन-आंदोलन की आवश्यकता है।

भाजपा में शामिल होने के बाद लगातार उठा रहे यह मुद्दा

भाजपा में शामिल होने के बाद चंपाई सोरेन अपने सार्वजनिक कार्यक्रमों और बयानों में घुसपैठ और आदिवासी जमीन की सुरक्षा का मुद्दा लगातार उठा रहे हैं। उनके ताजा बयान को भी इसी राजनीतिक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।

राजनीतिक बहस तेज होने के आसार

चंपाई सोरेन के बयान के बाद झारखंड की राजनीति में इस मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है। हालांकि, इस खबर के प्रकाशित होने तक उनके आरोपों पर राज्य सरकार की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

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