सरकार को 20 जून तक का अल्टीमेटम, नहीं मानी मांगें तो होगा बड़ा आंदोलन

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Jharkhand School Recognition Rules 2026: संशोधन नहीं हुआ तो 20 जून के बाद होगा बड़ा आंदोलन, वित्त रहित संस्थानों ने सरकार को दी चेतावनी

झारखंड माध्यमिक विद्यालय (कक्षा 9 से 12) स्थापना अनुमति एवं प्रस्वीकृति शर्त एवं बंधेज नियमावली-2026 को लेकर वित्त रहित शिक्षण संस्थानों का विरोध तेज हो गया है। राज्यभर से आए प्राचार्यों, प्रधानाचार्यों और शिक्षक प्रतिनिधियों की बैठक में नियमावली के कई प्रावधानों पर गंभीर आपत्ति जताते हुए सरकार से संशोधन की मांग की गई। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि मोर्चा के सुझावों के अनुरूप नियमावली में बदलाव नहीं किया गया तो 20 जून 2026 के बाद राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।

प्रमुख बातें

  • 20 जून के बाद आंदोलन की चेतावनी।
  • वित्त रहित संस्थानों के लिए भूमि और भवन संबंधी शर्तों पर आपत्ति।
  • सुरक्षा कोष व्यवस्था समाप्त करने की मांग।
  • संथाल परगना में SPT एक्ट के कारण विशेष छूट देने की मांग।
  • 75 प्रतिशत अनुदान लागू करने की मांग दोहराई गई।
  • सेवा शर्त नियमावली और राज्यकर्मी दर्जा पर कार्रवाई की मांग।
  • 5 वर्ष की अवधि देकर पढ़ाई शुरू करने की अनुमति देने का प्रस्ताव।

नियमावली में दोहरे मापदंड का आरोप

बैठक में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि नई नियमावली में सरकारी विद्यालयों और वित्त रहित संस्थानों के लिए अलग-अलग मानक निर्धारित किए गए हैं। मोर्चा का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी विद्यालयों के लिए एक एकड़ भूमि का प्रावधान रखा गया है, जबकि वित्त रहित संस्थानों के लिए दो एकड़ भूमि अनिवार्य कर दी गई है। इसे अनुचित और संस्थानों को परेशान करने वाला कदम बताया गया।

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भवन संबंधी शर्तों पर उठे सवाल

बैठक में कहा गया कि नियमावली के मसौदे में प्रधानाचार्य कक्ष के लिए 600 वर्ग फीट क्षेत्र निर्धारित किया गया है, जबकि राज्य के अधिकांश अंगीभूत कॉलेजों और प्लस टू विद्यालयों में भी इतना बड़ा कक्ष उपलब्ध नहीं है।

मोर्चा ने मांग की कि:

  • प्रधानाचार्य कक्ष का आकार यथार्थवादी बनाया जाए।
  • कार्यालय कक्ष को 600 वर्ग फीट से घटाकर 400 वर्ग फीट किया जाए।
  • पुस्तकालय का आकार 1000 वर्ग फीट के बजाय 600 वर्ग फीट रखा जाए।
  • प्रत्येक प्रयोगशाला का क्षेत्रफल 1000 वर्ग फीट के बजाय 600 वर्ग फीट किया जाए।
  • कंप्यूटर कक्ष को 400 वर्ग फीट तक सीमित किया जाए।

सुरक्षा कोष व्यवस्था समाप्त करने की मांग

बैठक में सुरक्षा कोष को लेकर भी नाराजगी व्यक्त की गई। प्रतिनिधियों का कहना था कि झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) सुरक्षा कोष पर कोई ब्याज नहीं देती और न ही इसकी पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराती है।

मोर्चा ने सुझाव दिया कि:

  • सुरक्षा कोष की राशि संबंधित संस्थानों के खातों में जमा करने की अनुमति दी जाए।
  • अथवा सुरक्षा कोष की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त कर दी जाए।
  • अन्य राज्यों की तर्ज पर केवल विषयवार शुल्क जमा कराने की व्यवस्था लागू की जाए।

संथाल परगना के लिए विशेष प्रावधान की मांग

बैठक में कहा गया कि संथाल परगना क्षेत्र में SPT एक्ट के कारण वर्ष 2010 के बाद कई स्कूल और कॉलेज मान्यता प्राप्त नहीं कर सके हैं। ऐसे में प्रधान पट्टा, दान पत्र और मदरसा संस्थानों की तरह भूमि संबंधी शर्तों में विशेष छूट देने का प्रावधान किया जाए।

इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित विद्यालयों और कॉलेजों के लिए औद्योगिक क्षेत्र की NOC को मान्य करने की भी मांग की गई।

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शिक्षकों की नियुक्ति और योग्यता पर भी उठी मांग

मोर्चा ने मांग की कि:

  • शिक्षकों की नियुक्ति 2009 की अधिसूचना के अनुसार की जाए।
  • शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों के पद सृजन संबंधी प्रावधान नियमावली में शामिल किए जाएं।
  • योग्यता एवं सेवा शर्तें भी 2009 की अधिसूचना के अनुरूप रखी जाएं।

4 लाख से अधिक छात्रों की पढ़ाई पर असर का दावा

बैठक में कहा गया कि वित्त रहित संस्थानों में चार लाख से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। ऐसे संस्थानों को वर्ष में केवल एक बार अनुदान मिलता है, जिसमें विकास मद के लिए मात्र 15 प्रतिशत राशि उपलब्ध होती है।

मोर्चा ने मांग की कि सरकारी विद्यालयों की तरह वित्त रहित संस्थानों को भी भवन निर्माण और आधारभूत संरचना विकास के लिए विशेष आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।

20 जून तक आंदोलन स्थगित

बैठक में बताया गया कि माध्यमिक शिक्षा निदेशक के आश्वासन के बाद फिलहाल आंदोलन को 20 जून 2026 तक स्थगित किया गया है। निदेशक ने मोर्चा की मांगों और सुझावों पर आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया है।

हालांकि नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि तय समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो पहले निदेशक से पुनः मुलाकात की जाएगी और उसके बाद आंदोलन शुरू किया जाएगा।

5 वर्ष का समय देकर पढ़ाई शुरू करने की मांग

मोर्चा ने सरकार से मांग की कि राज्य के 200 इंटर कॉलेजों और 334 विद्यालयों को कक्षा 9 से 12 तक पढ़ाई शुरू करने की अनुमति दी जाए तथा आधारभूत संरचना पूरी करने के लिए पांच वर्ष का समय दिया जाए।

प्रतिनिधियों का कहना था कि संस्थान निर्धारित अवधि में सभी आवश्यक शर्तों को पूरा कर देंगे। वहीं दूसरी ओर लगभग 750 मिडिल और उच्च विद्यालयों में कक्षा 6 से 12 तक पढ़ाई शुरू करने की तैयारी चल रही है, जबकि वहां भी आधारभूत सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं।

बैठक में पारित प्रमुख प्रस्ताव

1. वित्त रहित संस्थानों को अनुमति

सरकारी विद्यालयों की तरह वित्त रहित संस्थानों को भी कक्षा 9 से 12 तक पढ़ाई शुरू करने की अनुमति दी जाए और भवन निर्माण के लिए विशेष सहायता प्रदान की जाए।

2. 75 प्रतिशत अनुदान लागू करने की मांग

सरकार द्वारा विधानसभा में दिए गए आश्वासन के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में 75 प्रतिशत अनुदान लागू किया जाए। जिला स्तर पर लंबित भौतिक सत्यापन कार्य जल्द पूरा कराया जाए।

3. सभी जिलों से जांच रिपोर्ट मंगाने की मांग

मोर्चा ने मांग की कि सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों से शीघ्र जांच प्रतिवेदन प्राप्त कर अनुदान बढ़ाकर जारी किया जाए। अन्यथा विधानसभा सत्र के दौरान बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।

4. लंबित अनुदान शीघ्र जारी करने की मांग

जिन संस्थानों का अनुदान तकनीकी कारणों से रुका हुआ है, उनका भुगतान 30 जून 2026 से पहले किया जाए। साथ ही 2026-27 अनुदान के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया अगस्त माह से शुरू की जाए।

5. सेवा शर्त नियमावली बनाने की मांग

इंटर कॉलेज, उच्च विद्यालय, संस्कृत विद्यालय और मदरसों के लिए अलग सेवा शर्त नियमावली बनाई जाए ताकि अनुदान वितरण और सेवा संबंधी विवाद समाप्त हो सकें।

6. राज्यकर्मी दर्जा मामले पर कार्रवाई

कार्मिक विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा 17 मार्च 2025 को भेजे गए पत्र के आधार पर वित्त रहित संस्थानों के शिक्षक-कर्मचारियों को राज्यकर्मी का दर्जा देने की दिशा में कार्रवाई करने की मांग की गई।

राज्यव्यापी दौरे की घोषणा

बैठक में शिक्षक नेताओं ने कहा कि मोर्चा अपने अधिकारों, अस्तित्व और मांगों के लिए अंतिम समय तक संघर्ष करेगा। इसके लिए 25 जून के बाद राज्यभर के स्कूलों और कॉलेजों का दौरा कर शिक्षकों और कर्मचारियों को आंदोलन के लिए रांची आने का आह्वान किया जाएगा।

बैठक की अध्यक्षता चंद्रेश्वर पाठक ने की, जबकि संचालन गणेश महतो ने किया। बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी मोर्चा के प्रवक्ता मनीष कुमार ने मीडिया को दी।

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