रांची में महागठबंधन की ‘जिद’ ने BJP को थाली में परोस दी जीत!

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रांची मेयर चुनाव 2026: महागठबंधन की अंदरूनी खींचतान से बदली सियासी तस्वीर?

झारखंड में संपन्न हुए नगर निकाय चुनाव ने राज्य की राजनीति को नया संदेश दिया है। खासकर रांची मेयर सीट का परिणाम कई सवाल खड़े कर रहा है। यहां भाजपा समर्थित प्रत्याशी रोशनी खलखो ने जीत दर्ज कर राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है।

भाजपा समर्थित रोशनी खालको की जीत

रांची मेयर पद पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी रोशनी खलखो को कुल 1,57,669 वोट मिले। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस समर्थित रमा खलखो को हराया। यह जीत भाजपा खेमे के लिए मनोबल बढ़ाने वाली मानी जा रही है।

कांग्रेस प्रत्याशी को मिले 1,43,306 वोट

कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी रमा खलखो को कुल 1,43,306 वोट प्राप्त हुए। मतों का अंतर बहुत बड़ा नहीं रहा, जिससे यह साफ होता है कि मुकाबला कांटे का था। हालांकि अंतिम दौर में रोशनी ने बढ़त बनाए रखी।

जेएमएम समर्थित प्रत्याशी को 19,305 वोट

वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) समर्थित प्रत्याशी सुजीत विजय आनंद कुजूर को 19,305 वोट मिले। यही आंकड़ा अब राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है।

क्या महागठबंधन की एकजुटता बदल सकती थी नतीजा?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि महागठबंधन ने एक साझा प्रत्याशी उतारा होता, तो चुनावी तस्वीर अलग हो सकती थी। आंकड़ों के अनुसार, जेएमएम प्रत्याशी को मिले 19,305 वोट यदि कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में जाते, तो कुल मत 1,62,611 हो जाते, जो भाजपा समर्थित प्रत्याशी से अधिक होते।

इस गणित के आधार पर कहा जा रहा है कि महागठबंधन की आपसी खींचतान और अलग-अलग प्रत्याशी उतारने की रणनीति ने विपक्ष को नुकसान पहुंचाया है।

गठबंधन की रणनीति पर उठे सवाल

रांची जैसे महत्वपूर्ण नगर निगम क्षेत्र में महागठबंधन की रणनीतिक असहमति अब चर्चा का विषय बन गई है। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या आपसी समन्वय की कमी ने भाजपा को अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया?

विशेषज्ञों का मानना है कि नगर निकाय चुनाव भले ही स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हों, लेकिन इनके परिणाम राज्य की बड़ी राजनीति पर भी प्रभाव डालते हैं।

आने वाले समय में क्या बदलेगा समीकरण?

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस चुनाव परिणाम का असर महागठबंधन के आपसी रिश्तों पर कितना पड़ता है। क्या भविष्य में सीट बंटवारे और उम्मीदवार चयन को लेकर नई रणनीति बनेगी? या फिर अंदरूनी खींचतान और गहराएगी?

रांची मेयर चुनाव ने इतना तो स्पष्ट कर दिया है कि मतों का बिखराव किसी भी गठबंधन के लिए भारी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में इस परिणाम की राजनीतिक गूंज और तेज होने की संभावना है।

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