देवकुमार धान पर ग्लैडसन डुंगडुंग का पलटवार, बोले- “इसाई कहें या कसाई, मुझे फर्क नहीं पड़ता”
प्रमुख बातें
- ग्लैडसन डुंगडुंग ने देवकुमार धान के बयान पर पलटवार किया।
- बोले- “इसाई कहें या कसाई, मुझे फर्क नहीं पड़ता।”
- डुंगडुंग ने कहा कि उनका कद बढ़ रहा है, इसलिए कुछ लोग घबरा रहे हैं।
- आदिवासियों को सशक्त करने और बौद्धिक आंदोलन चलाने का दावा किया।
- कहा- उन्होंने आदिवासी मुद्दों पर कई किताबें लिखी हैं।
- देवकुमार धान ने पहले डुंगडुंग की धार्मिक पहचान को लेकर सवाल उठाया था।
- सरना धर्म कोड के मुद्दे पर भी दोनों के बीच मतभेद सामने आए हैं।
आदिवासी मुद्दों और सरना धर्म कोड को लेकर झारखंड में एक बार फिर जुबानी टकराव तेज हो गया है। आदिवासी एक्टिविस्ट ग्लैडसन डुंगडुंग ने आदिवासी नेता देवकुमार धान के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें कोई “इसाई” कहे या “कसाई”, इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। डुंगडुंग ने दावा किया कि आदिवासियों को सशक्त करने और बौद्धिक आंदोलन चलाने की उनकी कोशिशों से कुछ लोग असहज हैं।
‘इसाई कहें या कसाई, मुझे फर्क नहीं पड़ता’
देवकुमार धान की ओर से उनकी धार्मिक पहचान को लेकर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए ग्लैडसन डुंगडुंग ने कहा कि उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उन्हें कोई किस नाम से संबोधित करता है।
डुंगडुंग ने कहा कि उनका फोकस आदिवासी समाज को सशक्त बनाने और समाज में बौद्धिक आंदोलन खड़ा करने पर है।
‘मेरा कद बढ़ रहा है, इसलिए घबरा गए हैं’
ग्लैडसन डुंगडुंग ने दावा किया कि उनके काम और बढ़ते प्रभाव की वजह से कुछ लोग उनसे घबरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों पर लगातार काम कर रहे हैं और कई किताबें भी लिख चुके हैं।
उनका कहना है कि आदिवासियों के बीच चल रहे बौद्धिक विमर्श और सशक्तिकरण की कोशिशों से विरोध करने वाले लोग असहज हैं।
देवकुमार धान ने क्या कहा था?
दरअसल, पिछले दिनों देवकुमार धान ने ग्लैडसन डुंगडुंग को लेकर टिप्पणी की थी। धान का कहना था कि डुंगडुंग ईसाई हैं और उन्हें दूसरे धर्म को लेकर बोलने का अधिकार नहीं है।
इसी बयान के बाद अब ग्लैडसन डुंगडुंग ने पलटवार किया है। दोनों के बयानों के बाद आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों पर बहस और तेज हो गई है।
सरना धर्म कोड पर भी आमने-सामने
ग्लैडसन डुंगडुंग और देवकुमार धान के बीच विवाद सिर्फ व्यक्तिगत बयानों तक सीमित नहीं है। सरना धर्म कोड को लेकर भी दोनों के विचारों में मतभेद सामने आते रहे हैं।
यही वजह है कि दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी को आदिवासी समाज के अधिकार, पहचान और धार्मिक मुद्दों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
आदिवासी मुद्दों पर बढ़ी बहस
ग्लैडसन डुंगडुंग ने अपने बयान में आदिवासी सशक्तिकरण, बौद्धिक आंदोलन और लेखन को अपनी गतिविधियों का प्रमुख हिस्सा बताया। वहीं, देवकुमार धान की ओर से उनकी धार्मिक पहचान को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
अब देखना होगा कि सरना धर्म कोड और आदिवासी पहचान जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच यह वैचारिक टकराव आगे किस रूप में सामने आता है।
