विभागीय वार्ता विफल, मनरेगा कर्मियों ने CM स्तर पर बातचीत की रखी मांग

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76 दिनों से हड़ताल पर मनरेगा कर्मी, सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान

झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल लगातार जारी है। ग्रेड पे आधारित मानदेय, स्थायी समायोजन और सामाजिक सुरक्षा जैसी मांगों को लेकर राज्यभर के मनरेगा कर्मी 12 मार्च 2026 से हड़ताल पर हैं। अब संघ ने सरकार के खिलाफ आंदोलन को और व्यापक करने का ऐलान किया है।

विभागीय वार्ता में बनी थी सैद्धांतिक सहमति
संघ के अनुसार 13 और 14 मई 2026 को मनरेगा आयुक्त के साथ तथा 25 मई 2026 को ग्रामीण विकास विभाग के सचिव की अध्यक्षता में विस्तृत वार्ता हुई थी। इससे पहले 21 मई को संघ के प्रतिनिधिमंडल ने ग्रामीण विकास मंत्री से मुलाकात कर अपनी मांगों से अवगत कराया था।

वार्ता के दौरान निम्नलिखित बिंदुओं पर सैद्धांतिक सहमति बनी थी—
मनरेगा कर्मियों को ग्रेड पे आधारित मानदेय में शामिल किया जाएगा।
हड़ताल अवधि का मानदेय दिया जाएगा।
मृत कर्मियों के आश्रितों को नियुक्ति में प्राथमिकता मिलेगी।
कर्मियों को मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना से जोड़ा जाएगा।
“विभाग ने शब्दजाल से भ्रमित करने की कोशिश की”
संघ ने आरोप लगाया कि वार्ता के बाद विभाग द्वारा तैयार सहमति पत्र का मसौदा मनरेगा कर्मियों के हित में नहीं था। संघ का कहना है कि जिन बिंदुओं पर स्पष्ट सहमति बनी थी, उन्हें मसौदे में जानबूझकर अस्पष्ट रखा गया।

संघ ने इसे “लिपकीय चतुराई और कुटिल शब्दजाल” बताते हुए कहा कि विभाग की मंशा केवल किसी तरह हड़ताल खत्म कराने की थी, न कि समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने की।

“2024 के समझौते पर अब तक अमल नहीं”
मनरेगा कर्मचारी संघ ने कहा कि वर्ष 2024 के आंदोलन के बाद हुए लिखित समझौते को अब तक लागू नहीं किया गया है। इसी कारण विभागीय आश्वासनों पर मनरेगा कर्मियों का भरोसा खत्म हो चुका है। संघ ने स्पष्ट किया कि अब आगे केवल मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में ही वार्ता होगी। विभागीय अधिकारियों के साथ किसी भी स्तर पर बातचीत नहीं की जाएगी।

सरकार पर भय का माहौल बनाने का आरोप
संघ ने आरोप लगाया कि 25 मई की वार्ता विफल होने के बाद विभाग द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था, No Work No Pay और कठोर कार्रवाई की चेतावनी वाले पत्र जारी कर कर्मियों में भय पैदा करने की कोशिश की गई।
हालांकि संघ ने कहा कि इस तरह की चेतावनियों से मनरेगा कर्मी डरने वाले नहीं हैं। उल्टा विभाग के रवैये से आंदोलन को और मजबूती मिली है।

आंदोलन होगा और तेज
संघ ने घोषणा की है कि अब प्रखंड स्तर से लेकर राज्य स्तर तक व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा। इसके तहत कई कार्यक्रम तय किए गए हैं—
राज्य के सभी जिलों में प्रतिदिन धरना प्रदर्शन।
1 जून 2026 से ग्रामीण विकास मंत्री के महागामा स्थित आवास पर पांच दिवसीय महाधरना।
रांची में पुराना विधानसभा से प्रोजेक्ट भवन तक पदयात्रा और आक्रोश मार्च।
मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम।
“सरकार जिम्मेदार होगी”

संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और विभाग द्वारा सकारात्मक पहल नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और विभाग की होगी।

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