बिरसा मुंडा स्टेडियम में डूरंड कप 2026 के आयोजन की तैयारी

रांची में उतरेंगी देश-विदेश की 24 फुटबॉल टीमें, डूरंड कप का पूरा शेड्यूल जारी

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Durand Cup 2026: पहली बार रांची में होगा डूरंड कप, बिरसा मुंडा स्टेडियम में उतरेंगी 24 टीमों की टक्कर

रांची: झारखंड की राजधानी रांची पहली बार देश के प्रतिष्ठित डूरंड कप फुटबॉल टूर्नामेंट की मेज़बानी करने जा रही है। 135वें डूरंड कप का आयोजन 25 जुलाई से शुरू होगा, जबकि रांची में मुकाबले 26 जुलाई से 16 अगस्त तक बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में खेले जाएंगे। यह झारखंड के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

प्रमुख बातें

  • पहली बार डूरंड कप की मेज़बानी करेगा रांची
  • 26 जुलाई से 16 अगस्त तक बिरसा मुंडा स्टेडियम में होंगे मुकाबले
  • जमशेदपुर एफसी, स्पोर्टिंग क्लब दिल्ली और भारतीय वायुसेना की टीम खेलेगी
  • श्रीलंका की डिफेंडर्स एफसी पहली बार टूर्नामेंट में करेगी हिस्सा
  • 24 टीमें, 5 शहर और 23 अगस्त को कोलकाता में होगा फाइनल

पहली बार रांची को मिली मेज़बानी

डूरंड कप के 135वें संस्करण में पहली बार रांची को मेज़बान शहर बनाया गया है। टूर्नामेंट के तहत राजधानी में लीग चरण के कई मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा एक महत्वपूर्ण क्वार्टर फाइनल मैच भी रांची में खेला जाएगा।

इन टीमों पर रहेंगी सबकी निगाहें

रांची में होने वाले मुकाबलों में इंडियन सुपर लीग (ISL) की मजबूत टीम जमशेदपुर एफसी, स्पोर्टिंग क्लब दिल्ली और भारतीय वायुसेना फुटबॉल टीम मैदान में उतरेंगी। वहीं, श्रीलंका सशस्त्र बलों की टीम डिफेंडर्स एफसी पहली बार इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का हिस्सा बनेगी।

पांच शहरों में होगा आयोजन

इस बार डूरंड कप में कुल 24 टीमें भाग ले रही हैं। मुकाबले कोलकाता, रांची, इम्फाल, शिलांग और गुवाहाटी में खेले जाएंगे। टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला 23 अगस्त को कोलकाता के विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन में आयोजित होगा।

एशिया का सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट

डूरंड कप एशिया का सबसे पुराना और दुनिया का तीसरा सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट माना जाता है। इसका आयोजन भारतीय सेना द्वारा किया जाता है। यह प्रतियोगिता युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा मंच प्रदान करती है।

झारखंड के फुटबॉल को मिलेगा बढ़ावा

रांची में डूरंड कप के आयोजन से राज्य में फुटबॉल संस्कृति को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। स्थानीय खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर की टीमों को करीब से देखने और प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इससे झारखंड में फुटबॉल के विकास को नई गति मिलेगी।

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