नई नियमावली के खिलाफ बगावत! 1250 संस्थानों में जलाई गई ड्राफ्ट की प्रतियां

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नई नियमावली के विरोध में उग्र हुआ वित्त रहित शिक्षा मोर्चा, ड्राफ्ट की प्रतियां जलाकर जताया विरोध

रांची। वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने नई शिक्षा नीति 2020 के तहत कक्षा 9 से 12 तक के संचालन के लिए प्रस्तावित नियमावली-2026 के प्रारूप के खिलाफ राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन किया। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत झारखंड के विभिन्न जिलों में इंटर कॉलेजों और उच्च विद्यालयों के मुख्य द्वार पर नियमावली के ड्राफ्ट की प्रतियां जलाकर शिक्षकों और कर्मचारियों ने अपना विरोध दर्ज कराया।

मोर्चा का आरोप है कि प्रस्तावित नियमावली में ऐसी कई शर्तें जोड़ी गई हैं, जिन्हें पूरा करना अधिकांश वित्त रहित संस्थानों के लिए संभव नहीं है। इससे वर्षों से संचालित हो रहे अनेक शिक्षण संस्थानों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो सकता है।

प्रमुख बातें

  • राज्यभर के 1250 से अधिक संस्थानों में नियमावली की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन।
  • मोर्चा ने नई नियमावली को वित्त रहित संस्थानों के खिलाफ बताया।
  • भूमि, सुरक्षा राशि और आधारभूत संरचना संबंधी प्रावधानों पर जताई आपत्ति।
  • माध्यमिक शिक्षा निदेशक के साथ हुई सकारात्मक वार्ता।
  • 12 जून का प्रस्तावित महाधरना 20 जून तक स्थगित।
  • सुझाव देने के बाद नियमावली में संशोधन का आश्वासन।

नियमावली की कई शर्तों पर उठाए सवाल

मोर्चा के नेताओं का कहना है कि नई नियमावली में वित्त रहित विद्यालयों और इंटर कॉलेजों के लिए ऐसी शर्तें निर्धारित की गई हैं, जिनका पालन करना बेहद कठिन है। शिक्षकों के अनुसार सरकारी विद्यालयों के लिए जहां एक एकड़ भूमि की अनिवार्यता रखी गई है, वहीं वित्त रहित संस्थानों के लिए दो एकड़ भूमि की शर्त लागू की गई है।

इसी प्रकार सुरक्षा कोष की राशि में भी भारी बढ़ोतरी प्रस्तावित की गई है। पहले इंटर कॉलेजों के लिए सुरक्षा राशि 1.5 लाख रुपये थी, जिसे बढ़ाकर सामान्य क्षेत्रों के लिए 6 लाख और अनुसूचित जाति एवं जनजाति बहुल क्षेत्रों के लिए 4 लाख रुपये कर दिया गया है।

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पुस्तकालय और प्रयोगशालाओं के प्रावधान पर नाराजगी

मोर्चा ने नियमावली में पुस्तकालय और प्रयोगशालाओं के लिए निर्धारित मानकों पर भी सवाल उठाया है। प्रस्तावित ड्राफ्ट के अनुसार 1000 वर्गफीट का एक पुस्तकालय और 1000 वर्गफीट की चार प्रयोगशालाएं अनिवार्य की गई हैं।

शिक्षकों का कहना है कि राज्य के अधिकांश विद्यालयों और कॉलेजों में इस प्रकार की व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इन शर्तों को लागू करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि चार-चार बड़े प्रयोगशालाओं की अनिवार्यता का औचित्य क्या है।

शिक्षकों के भविष्य को लेकर भी चिंता

मोर्चा ने यह भी कहा कि वर्ष 2010 में तत्कालीन अधिसूचना के तहत इंटर कॉलेजों में पद सृजित किए गए थे और उसी आधार पर नियुक्तियां हुई थीं। नई नियमावली में पदों की संख्या कम किए जाने से कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।

साथ ही संथाल परगना क्षेत्र में एसपीटी एक्ट के कारण पहले से ही स्कूल और कॉलेजों को मान्यता मिलने में कठिनाइयां हैं। मोर्चा का आरोप है कि नई नियमावली में इस समस्या के समाधान के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं की गई है।

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“वित्त रहित संस्थानों को बंद करने की साजिश”

मोर्चा के नेताओं ने आरोप लगाया कि नई नियमावली के माध्यम से वित्त रहित संस्थानों को धीरे-धीरे बंद करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि पिछले 25 से 30 वर्षों से संचालित संस्थानों के पास पहले से निर्धारित मानकों के अनुरूप आधारभूत संरचनाएं मौजूद हैं। ऐसे में नई शर्तों को लागू करना अव्यावहारिक है।

निदेशक माध्यमिक शिक्षा से हुई सकारात्मक वार्ता

विरोध कार्यक्रम के बीच मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक से मुलाकात कर ड्राफ्ट की विभिन्न कमियों और त्रुटियों को विस्तार से रखा। प्रतिनिधियों ने एक-एक बिंदु पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।

निदेशक ने मोर्चा की बातों को गंभीरता से सुना और स्वीकार किया कि कई मांगें उचित हैं। उन्होंने सुझावों को लिखित रूप में ज्ञापन के जरिए उपलब्ध कराने को कहा तथा भरोसा दिलाया कि उन पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।

सुरक्षा राशि और प्रयोगशालाओं पर पुनर्विचार के संकेत

वार्ता के दौरान निदेशक ने माना कि सुरक्षा राशि में अत्यधिक वृद्धि की गई है और इस पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि 1000 वर्गफीट के प्रयोग कक्ष की अनिवार्यता अधिक प्रतीत होती है तथा कम क्षेत्रफल में भी शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन संभव है।

12 जून का महाधरना 20 जून तक स्थगित

माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा सकारात्मक आश्वासन दिए जाने के बाद वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने 12 जून 2026 को राजभवन/लोक भवन के समक्ष प्रस्तावित महाधरना को फिलहाल 20 जून तक स्थगित करने की घोषणा की है।

मोर्चा का कहना है कि यदि नियमावली में आवश्यक संशोधन नहीं किए गए तो आंदोलन को आगे और तेज किया जाएगा।

नेताओं ने संघर्ष जारी रखने का लिया संकल्प

मोर्चा के नेताओं रघुनाथ सिंह, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, चंदेश्वर पाठक, देवनाथ सिंह, अरविंद सिंह, गणेश महतो, फजलुल कादरी अहमद, मनीष कुमार, नरोत्तम सिंह, संजय कुमार, मनोज तिर्की, विनय उरांव, मुरारी प्रसाद सिंह और रेशमा बेक ने कहा कि राज्यभर के 1250 संस्थानों के शिक्षक एवं कर्मचारी इस नियमावली के खिलाफ एकजुट हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक प्रस्तावित नियमावली में आवश्यक संशोधन नहीं किए जाते, तब तक संघर्ष जारी रहेगा और वर्तमान स्वरूप में नियमावली को लागू नहीं होने दिया जाएगा।

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