“स्थानीय भाषाओं को नजरअंदाज कर किसका भला? जेटेट फैसला कठघरे में”

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JTET विवाद: भोजपुरी, मगही और अंगिका को बाहर रखने पर उठा सवाल

रांची: झारखंड कैबिनेट द्वारा JTET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) नियमावली को मंजूरी दिए जाने के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। नियमावली में भोजपुरी, मगही और अंगिका जैसी प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल नहीं किया गया है, जिस पर विभिन्न संगठनों और लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

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क्या है पूरा मामला?

कैबिनेट की बैठक में कुल 15 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनमें JTET नियमावली-2026 भी शामिल है। हालांकि, इस नियमावली में क्षेत्रीय भाषाओं को स्थान न मिलने से असंतोष देखने को मिल रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इन भाषाओं को शामिल करने को लेकर पहले भी चर्चा हुई थी, लेकिन अंतिम निर्णय में इन्हें शामिल नहीं किया गया।

भाषाई अस्मिता पर बहस तेज

भोजपुरी, मगही और अंगिका झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषाएं हैं। ऐसे में इन भाषाओं को नजरअंदाज किए जाने को कई लोग भाषाई अस्मिता से जोड़कर देख रहे हैं।

कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि स्थानीय भाषाओं को शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में महत्व मिलना चाहिए, ताकि क्षेत्रीय छात्रों को बेहतर अवसर मिल सके।

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सरकार का पक्ष

सरकार की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, कुछ अधिकारियों का कहना है कि नियमावली में बदलाव भविष्य में संभव है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे क्षेत्रीय भाषाओं की अनदेखी करार दिया है, वहीं कुछ विशेषज्ञ इसे नीति आधारित निर्णय बता रहे हैं।

आगे क्या?

JTET नियमावली को लेकर बढ़ते विवाद के बीच यह देखना अहम होगा कि सरकार इस पर पुनर्विचार करती है या नहीं। फिलहाल, यह मुद्दा राज्य में भाषा और शिक्षा नीति पर नई बहस को जन्म दे चुका है।

(अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताएं — क्या क्षेत्रीय भाषाओं को JTET में शामिल किया जाना चाहिए?)

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