ज्यां द्रेज ने लोकतंत्र में बढ़ती असमानता और कॉरपोरेट नियंत्रण पर उठाए सवाल

झारखंड/बिहार ताज़ा ख़बर राष्ट्रीय ख़बर

लुगू बुरु में जनाधिकारों की गूंज, दूसरे राज्य सम्मेलन का आगाज़

झारखंड जनाधिकार महासभा का दूसरा राज्य सम्मेलन 13–14 अप्रैल 2026 को लुगू बुरु घंटाबाड़ी धोरोम गढ़, ललपनिया (गोमिया, बोकारो) में शुरू हुआ। यह मंच सामाजिक कार्यकर्ताओं और जन संगठनों का साझा प्रयास है, जो आदिवासी, दलित, किसान, मजदूर, महिला और अन्य वंचित समुदायों के अधिकारों के लिए लंबे समय से संघर्ष करता रहा है।

सम्मेलन की शुरुआत ऐतिहासिक जननायकों—तिलका मांझी, सिद्धू-कान्हू, बिरसा मुंडा, फूलो-झानो, जयपाल सिंह मुंडा और स्टेन स्वामी—को ‘हूल जोहार’ अर्पित कर की गई।

चाईबासा में मुखिया सम्मेलन 2026: उत्कृष्ट कार्य करने वाले मुखियाओं को सम्मान

लुगू बुरु: परंपरा और स्वायत्तता का प्रतीक

सम्मेलन में दिनेश मुर्मू ने लुगू बुरु के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह स्थल आदिवासी समाज की सामूहिक चेतना और निर्णय का प्रतीक है। यहां बाहरी हस्तक्षेप से बचाने के लिए मंदिर निर्माण नहीं होने दिया गया, ताकि यह स्थान केवल आदिवासी-संथाली पूजा स्थल के रूप में सुरक्षित रह सके।

समिति अध्यक्ष बाबली सोरेन ने कहा कि बिना लिखित संविधान के भी यहां के लोग सदियों से अपनी भाषा, परंपरा और संस्कृति को संरक्षित करते आए हैं। उन्होंने आगामी जनगणना में सरना धर्म कोड की मांग को लेकर लोगों से एकजुट होने की अपील की।

लोकतंत्र, असमानता और दमन पर उठे सवाल

सम्मेलन के प्रारंभिक सत्र में कई प्रमुख वक्ताओं ने वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक हालात पर चिंता जताई।

अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने लोकतंत्र को केवल चुनाव तक सीमित न मानते हुए इसके व्यापक स्वरूप पर जोर दिया। उन्होंने बढ़ती आर्थिक असमानता और कॉरपोरेट नियंत्रण को लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती बताया।

पूर्व विधायक विनोद सिंह ने कहा कि देश में आदिवासियों और आंदोलनकारियों को झूठे मामलों में फंसाकर दमन किया जा रहा है और मजदूरों पर लाठीचार्ज जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने आर्थिक समानता को न्यायपूर्ण समाज की बुनियाद बताया।

बिहार में बैठकर झारखंड उत्पाद सिपाही परीक्षा का पेपर लीक, सरगना अतुल वत्स

विस्थापन, कॉरपोरेट कब्ज़ा और भूमि अधिकार पर चिंता

प्रमुख आदिवासी कार्यकर्ता दयामनी बरला ने झारखंड में बढ़ते विस्थापन और कॉरपोरेट हस्तक्षेप पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि भूमि बैंक के जरिए बड़े कॉरपोरेट घरानों को जमीन सौंपी जा रही है, जिससे ग्रामसभा के अधिकार कमजोर हो रहे हैं।

उन्होंने CNT/SPT कानून, पांचवीं अनुसूची और वन अधिकारों की रक्षा के लिए राज्यभर में एकजुट संघर्ष का आह्वान किया। साथ ही मनरेगा को बहाल करने और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए आंदोलन तेज करने की जरूरत बताई।

शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक न्याय के मुद्दे

युवा कार्यकर्ता मनोज भुइयां ने दलित और आदिवासी समुदायों के आर्थिक और मानसिक शोषण की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि अनुसूचित जाति आयोग का गठन अब तक नहीं हुआ है और छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिल रही।

नीतिशा खलखो ने नई शिक्षा नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसके जरिए मनुवादी सोच को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाठ्यक्रम में उपनिषद, रामायण और मनुस्मृति जैसे ग्रंथों को प्राथमिकता देकर आदिवासी इतिहास और भाषाओं—जैसे संथाली, कुरुख और हो—को हाशिये पर डाला जा रहा है।

व्यापक एकजुटता और संघर्ष का आह्वान

सम्मेलन के अन्य सत्रों में प्रवीर पीटर, अम्बिका यादव, संजू, मीणा मुर्मू, रमेश जेराई और अशोक पल सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

इस सम्मेलन में पश्चिमी सिंहभूम, लातेहार, बोकारो, सरायकेला-खरसावां, खूंटी, पाकुड़, गोड्डा, चतरा और पूर्वी सिंहभूम सहित विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

महासभा ने सम्मेलन के माध्यम से जल-जंगल-जमीन, संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए राज्यव्यापी एकजुटता को मजबूत करने का संकल्प दोहराया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *