वोटर लिस्ट से नाम कटेगा या बचेगा? CEO ने साफ किया पूरा नियम

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15 जून तक पूरा करें मतदाता मैपिंग कार्य, अनमैप्ड वोटरों से करें संपर्क: मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी

रांची। झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के. रवि कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राज्य में 15 जून तक मतदाताओं की मैपिंग का कार्य हर हाल में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं का नाम पूर्व के गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची से सफलतापूर्वक मैप हो जाएगा, उन्हें विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के दौरान सामान्य रूप से किसी अतिरिक्त दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी।

प्रमुख बातें

  • 15 जून तक मतदाता मैपिंग कार्य पूरा करने का निर्देश।
  • मैप्ड मतदाताओं को सामान्यतः अतिरिक्त दस्तावेज नहीं देने होंगे।
  • अनमैप्ड मतदाताओं का नाम प्रारूप सूची से नहीं कटेगा।
  • नोटिस मिलने पर अनमैप्ड मतदाताओं को दस्तावेज जमा करने होंगे।
  • मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 7 अक्टूबर 2026 को होगा।
  • फॉर्म-6, 7 और 8 की लंबित आवेदनों को 15 जून तक निपटाने का निर्देश।

अनमैप्ड मतदाताओं को देना होगा आवश्यक दस्तावेज

निर्वाचन सदन से सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ ऑनलाइन समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि यदि कोई मतदाता अनमैप्ड रहता है, तो उसका नाम प्रारूप मतदाता सूची से स्वतः नहीं हटाया जाएगा। ऐसे मतदाताओं को निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ERO) की ओर से नोटिस जारी किया जाएगा।

नोटिस मिलने के बाद मतदाताओं को अपनी जन्म तिथि के आधार पर स्वयं, माता-पिता अथवा दादा-दादी से संबंधित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। दावा एवं आपत्तियों के निस्तारण के बाद 7 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

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गलत मैपिंग पर होगी सुनवाई

के. रवि कुमार ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि मतदाताओं की गलत मैपिंग से बचा जाए। उन्होंने कहा कि गलत तरीके से मैप किए गए मामलों को “एनोमली केस” के रूप में चिह्नित किया जाएगा, जिनकी सुनवाई ERO द्वारा की जाएगी।

ऐसे मामलों में संबंधित मतदाताओं को भी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। इसलिए मैपिंग कार्य की नियमित और सघन समीक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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अनमैप्ड मतदाताओं तक पहुंचने का निर्देश

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि अनमैप्ड मतदाताओं की सूची में शामिल प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास किया जाए। साथ ही सूची में ऐसे मतदाताओं की पहचान भी की जाए जो:

  • अनुपस्थित (Absent) हैं।
  • स्थानांतरित (Shifted) हो चुके हैं।
  • मृत (Death) हैं।
  • डुप्लीकेट (Duplicate) हैं।
  • गैर-नागरिक (Non-Citizen) श्रेणी में आते हैं।

पात्र भारतीय नागरिकों को जोड़ना है मुख्य उद्देश्य

समीक्षा बैठक में श्री रवि कुमार ने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रह जाए।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रक्रिया का लाभ केवल पात्र भारतीय नागरिकों को मिले तथा किसी भी गैर-भारतीय नागरिक को इस प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर न मिले।

बीएलओ परिवर्तन पर भी निर्देश

बैठक के दौरान मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से मैपिंग प्रक्रिया, एसआईआर की कार्यप्रणाली तथा आवश्यक दस्तावेजों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन्यूमरेशन फॉर्म में संबंधित बीएलओ (BLO) का नाम और मोबाइल नंबर अंकित रहेगा।

उन्होंने निर्देश दिया कि 15 जून के बाद किसी भी बीएलओ को बदला न जाए, ताकि मतदाताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

कम मैपिंग वाले बीएलओ की समीक्षा

समीक्षा के दौरान कम मैपिंग वाले बीएलओ से ऑनलाइन बातचीत कर इसके कारणों की जानकारी ली गई। अधिकारियों को ऐसे बीएलओ के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और क्षमता संवर्धन कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए।

इसके अलावा राज्य के सभी जिलों में फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 से संबंधित लंबित मामलों को 15 जून तक पूरी तरह समाप्त करने का निर्देश दिया गया।

अधिकारियों की रही मौजूदगी

बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार, प्रशिक्षण नोडल पदाधिकारी देव दास दत्ता, उप निर्वाचन पदाधिकारी धीरज कुमार ठाकुर, अवर निर्वाचन पदाधिकारी सुनील कुमार सहित राज्य के सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारी एवं उप निर्वाचन पदाधिकारी ऑनलाइन माध्यम से उपस्थित रहे।

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