“अनुदान नहीं, अब वेतन चाहिए” — शिक्षकों का सरकार को अल्टीमेटम.

झारखंड/बिहार ताज़ा ख़बर रोज़गार समाचार

वित्त रहित संस्थानों ने किया बड़ा ऐलान — 75% अनुदान वृद्धि पर टकराव, सरकार को दी चेतावनी: “अब अनुदान नहीं, वेतन चाहिए”

मुख्य बिंदु:

75% अनुदान वृद्धि प्रस्ताव दो महीने से कैबिनेट में लंबित

वित्त, विधि, कैबिनेट सचिव व मुख्य सचिव सभी दे चुके हैं सहमति

राज्य के 600 संस्थानों ने अनुदान प्रपत्र भरने से किया इंकार

7 से 8 हजार शिक्षक-कर्मचारी करेंगे अनुदान का बहिष्कार

सावित्रीबाई फुले योजना से भी वंचित हो रहीं गरीब बालिकाएं

——————————

रांची | 19 अक्टूबर 2025
वित्त रहित शैक्षणिक संस्थानों ने राज्य सरकार के खिलाफ बड़ा निर्णय लिया है। झारखंड में अनुदान वृद्धि के प्रस्ताव को लेकर सरकार की चुप्पी से नाराज इन संस्थानों ने चेतावनी दी है कि जब तक 75% अनुदान वृद्धि और राज्यकर्मी का दर्जा नहीं मिलेगा, तब तक वे अनुदान प्रपत्र (ऑनलाइन या ऑफलाइन) नहीं भरेंगे।

यह फैसला आज मोर्चा के घटक संगठनों की संयुक्त बैठक में लिया गया। बैठक में कहा गया कि यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो राज्य के 195 अनुदानित इंटर कॉलेज, 305 स्वीकृत उच्च विद्यालय, 47 मदरसा और 40 संस्कृत विद्यालय वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान प्रक्रिया से बाहर रहेंगे।

2005 से अनुदान, पर 10 साल से नहीं हुई वृद्धि

मोर्चा के नेताओं ने बताया कि राज्य सरकार 2005 से इन संस्थानों को अनुदान देती आ रही है। पहले छात्र संख्या के आधार पर सिंगल अनुदान मिलता था। 2015 में महंगाई को देखते हुए अनुदान राशि दोगुनी की गई, पर इसके बाद से 10 वर्षों में ₹1 की भी वृद्धि नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि अब जब केंद्र सरकार ने आठवां वेतनमान लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है, तब भी राज्य के वित रहित संस्थान पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं।

वित्त, विधि और मुख्य सचिव — सबकी सहमति, फिर कैबिनेट में अटके प्रस्ताव

बैठक में यह सवाल उठाया गया कि अनुदान वृद्धि का प्रस्ताव वित्त विभाग, विधि विभाग, कैबिनेट सचिव और मुख्य सचिव — सभी स्तरों से मंजूरी पा चुका है, फिर भी इसे दो महीने से कैबिनेट में क्यों नहीं लाया गया?
मोर्चा नेताओं ने कहा, “जब वित्त की सहमति है तो समस्या आखिर कहां है?”

योजनाओं से भी वंचित हो रहे गरीब बच्चे

मोर्चा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वित्त रहित संस्थानों में पढ़ने वाले तीन लाख से अधिक छात्र-छात्राएं विभिन्न योजनाओं से वंचित हो रहे हैं।
सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना, साइकिल योजना, पोशाक योजना और किताब वितरण योजना — सभी से इन संस्थानों के गरीब, दलित और कमजोर वर्ग के बच्चे बाहर कर दिए गए हैं।
नेताओं ने कहा कि इस साल फुले योजना का पोर्टल ही नहीं खुला, जबकि नियमावली में स्पष्ट लिखा है कि नियमित अनुदानित संस्थानों की बालिकाएं इसका लाभ पा सकती हैं।

अनुदान में देरी और राशि लैप्स होने का आरोप

मोर्चा के अनुसार, अनुदान हर साल समय पर नहीं मिलता। 2023-24 में 73% और 2024-25 में 88% अनुदान मिला।
बाकी 12% न तो दशहरा, न दीपावली और न ही छठ पर्व तक दिया गया, जबकि कोष में राशि उपलब्ध थी। मार्च 2025 में लगभग 9 करोड़ रुपये की राशि लैप्स हो गई, जबकि केवल 7 करोड़ रुपये से बाकी अनुदान का भुगतान संभव था।

“अनुदान भीख होता है, अब अधिकार चाहिए”

बैठक में शिक्षकों ने कहा, “अनुदान भीख होता है और जब वही समय पर नहीं दिया जाए तो यह धोखा है। अब हमें भीख नहीं, अधिकार चाहिए। राज्यकर्मी का दर्जा और वेतन चाहिए।”
मोर्चा ने साफ कहा कि यदि 75% अनुदान वृद्धि और राज्यकर्मी दर्जे की मांग पूरी नहीं हुई तो कोई भी संस्थान अनुदान के लिए आवेदन नहीं करेगा।

03 नवंबर को अध्यक्ष मंडल की अहम बैठक

मोर्चा ने 03 नवंबर को अध्यक्ष मंडल की बैठक बुलाई है, जिसमें इस निर्णय को औपचारिक मंजूरी दी जाएगी।

बैठक में कुंदन कुमार सिंह, रघुनाथ सिंह, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, फजलुल कादरी अहमद, अरविंद सिंह, चंदेश्वर पाठक, देवनाथ सिंह, मनीष कुमार, गणेश महतो, नरोत्तम सिंह, मनोज तिर्की, विनय उरांव, पशुपति महतो, संजय कुमार, मुरारी प्रसाद सिंह और विनय कुमार शामिल हुए।
प्रेस को बैठक की जानकारी मनीष कुमार और अरविंद सिंह ने दी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *