पुरुषोत्तम मास में सेवा का अनूठा उदाहरण: कचहरी चौक पर रोजाना जरूरतमंदों को कराया जा रहा भोजन
रांची में पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) के अवसर पर सेवा और समर्पण की एक प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिल रही है। शहर के कचहरी चौक पर प्रतिदिन जरूरतमंदों, राहगीरों और श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क भोजन वितरण किया जा रहा है। यह सेवा 15 मई से शुरू हुई है और 16 जून तक लगातार जारी रहेगी।
प्रमुख बातें
- रांची के कचहरी चौक पर रोजाना निःशुल्क भोजन वितरण
- पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) के अवसर पर चल रही सेवा
- 15 मई से शुरू होकर 16 जून तक चलेगा आयोजन
- घर पर तैयार किया जाता है पूरा भोजन
- बड़ी संख्या में जरूरतमंद और राहगीर उठा रहे लाभ
आज की प्रसादी में परोसे गए कई व्यंजन
सेवा कार्य से जुड़े लोगों के अनुसार, प्रतिदिन अलग-अलग प्रकार की प्रसादी तैयार की जाती है। श्रद्धालुओं और जरूरतमंदों के बीच खिरानंद, मूंग दाल पकौड़ी, पुलाव, दाल मखनी, आलू-परवल की सब्जी तथा लीची जूस का वितरण किया गया।
आयोजकों का कहना है कि भोजन पूरी तरह घर पर तैयार किया जाता है और गुणवत्ता के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाता।
शर्मा बंधु की पहल को मिल रहा सहयोग
इस सेवा अभियान का संचालन शर्मा बंधु एवं उनके सहयोगियों द्वारा किया जा रहा है। आयोजन से जुड़े प्रमुख लोगों में राम गोपाल शर्मा, सुरेश जोशी, अमित शर्मा, अशोक शर्मा, सुरेंद्र शर्मा तथा सुनीता मिश्रा सहित कई समाजसेवी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
आयोजकों का कहना है कि पुरुषोत्तम मास को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। ऐसे में जरूरतमंदों की सेवा और भोजन वितरण को उन्होंने अपने सामाजिक दायित्व के रूप में अपनाया है।
सेवा भाव से जुड़ रहे लोग
रोजाना बड़ी संख्या में लोग इस सेवा अभियान में सहयोग भी कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वर्तमान समय में इस प्रकार के सामाजिक और मानवीय प्रयास समाज को सकारात्मक संदेश देने का काम करते हैं।
आयोजन समिति ने बताया कि 16 जून तक यह सेवा अभियान निरंतर जारी रहेगा और प्रतिदिन अलग-अलग प्रकार की प्रसादी लोगों के बीच वितरित की जाएगी।
मानवता और सेवा का संदेश
पुरुषोत्तम मास के दौरान चल रहा यह अभियान केवल भोजन वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और मानवता का संदेश भी दे रहा है। जरूरतमंदों तक सम्मानपूर्वक भोजन पहुंचाने की यह पहल लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
