मुख्य बिंदु
1. राजभवन ने आदेश में संशोधन कर 12वीं के छात्रों को उसी कॉलेज में पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी।
2. विधायक सरयू राय के हस्तक्षेप और प्रयास से यह निर्णय संभव हुआ।
3. राज्यपाल और स्कूली शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने छात्रों के हित में उठाया सराहनीय कदम।
4. हजारों छात्रों को राहत, प्रतिनिधिमंडल ने सरयू रा
य को जताया आभार।
5. सरयू राय ने अब शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की समस्या हल करने का भरोसा जताय
सरयू राय के हस्तक्षेप से बदला आदेश
जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय के लगातार प्रयासों के बाद 12वीं के छात्रों को राहत मिली है। नई शिक्षा नीति के तहत पहले जारी आदेश में संशोधन करते हुए अब राजभवन ने स्पष्ट किया है कि छात्र अपने ही महाविद्यालयों में पढ़ाई जारी रख सकेंगे। इस फैसले से राज्य भर के हजारों छात्रों और अभिभावकों ने राहत की सांस ली है।
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राजभवन और मंत्रियों से की थी सीधी बातचीत
सरयू राय ने खुलासा किया कि एक सप्ताह पूर्व उन्होंने राज्यपाल के प्रधान सचिव, स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा के सचिवों तथा मंत्रियों से संवाद किया था। उन्होंने बताया कि बिना तैयारी लागू की गई नई शिक्षा नीति के कारण छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इस स्थिति को लेकर उन्होंने अधिकारियों को अवगत कराया।
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रामदास सोरेन ने दिया था भरोसा
राय ने बताया कि उन्होंने राज्य के स्कूली शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन से भी फोन पर विस्तृत चर्चा की थी। मंत्री ने भरोसा दिया कि राज्य सरकार इस संबंध में राजभवन को संशोधन प्रस्ताव भेजेगी। मंत्री के अनुरोध पर श्री राय ने उस बातचीत को गोपनीय रखा और अब मंत्री द्वारा किया गया वादा पूरा हो गया।
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आदेश में हुआ संशोधन, छात्र अब देंगे परीक्षा अपने कॉलेज से
राजभवन की नई अधिसूचना के अनुसार अब 12वीं के छात्र उन्हीं महाविद्यालयों से परीक्षा देंगे, जहां वे वर्तमान में पढ़ रहे हैं। शनिवार की शाम को छात्रों और शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल सरयू राय से मिला और उन्हें धन्यवाद दिया। प्रतिनिधिमंडल में नवनीत सिंह, राजीव दुबे, अनिमेष बख्शी, उपेंद्र राणा समेत दर्जनों लोग शामिल थे।
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अब शिक्षकों और कर्मचारियों की बारी
सरयू राय ने कहा कि हालांकि छात्रों की समस्या हल हो गई है, लेकिन शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की समस्या अभी भी बनी हुई है। वे इसके समाधान के लिए सरकार और राजभवन से वार्ता करेंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि जब तक नई शिक्षा नीति को पूरी तरह लागू करने की आधारभूत संरचना तैयार नहीं हो जाती, तब तक झारखंड में हाईब्रिड मॉडल अपनाया जाना चाहिए। इसके तहत सरकारी महाविद्यालयों में अलग से इंटर कॉलेज स्थापित किए जा सकते हैं।
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इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि छात्रों के हित में सरयू राय का प्रयास न सिर्फ सार्थक रहा, बल्कि नीति-निर्माताओं पर प्रभावी भी साबित हुआ। अब नजर इस पर होगी कि क्या शिक्षकों की मांगों को भी समान संवेदनशीलता के साथ निपटाया जाएगा।
