झारखंड में रबी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने पर जोर, खेत बचाओ अभियान के तहत अधिकारियों को दिए गए निर्देश
कृषि सचिव अबु बकर सिद्दीकी ने अधिकारियों से गांवों और खेतों तक पहुंचने को कहा, परती भूमि के उपयोग, मृदा स्वास्थ्य और सिंचाई व्यवस्था सुधारने पर विशेष फोकस
रांची: झारखंड में किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादन में सुधार और खेतों की उर्वरता बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने खेत बचाओ अभियान और रबी फसल की तैयारी पर जोर दिया है। इसी उद्देश्य से गुरुवार को रांची के हेसाग स्थित पशुपालन भवन में ‘खेत बचाओ अभियान सह राज्य स्तरीय रबी कर्मशाला-2026’ का आयोजन किया गया। इसमें कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कृषि पदाधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने कृषि विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
प्रमुख बातें
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झारखंड में खेत बचाओ अभियान और रबी फसल उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर।
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परती भूमि का बेहतर उपयोग कर फसल आच्छादन क्षेत्र बढ़ाने की तैयारी।
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खेतों की उर्वरता और मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने पर फोकस।
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रासायनिक उर्वरकों के संतुलित और सुरक्षित इस्तेमाल की सलाह।
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तालाबों, नहरों और अन्य सिंचाई संसाधनों का अद्यतन डेटा तैयार करने के निर्देश।
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किसानों को सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का अधिकतम लाभ दिलाने पर जोर।
किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय रहें अधिकारी
कर्मशाला को संबोधित करते हुए कृषि सचिव अबु बकर सिद्दीकी पी ने जिला स्तरीय अधिकारियों से पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अधिकारियों का उद्देश्य किसानों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए। इसके लिए किसानों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करना और उनकी समस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। ऐसे में अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि किसानों को इन योजनाओं की पूरी जानकारी मिले और वे उनका अधिकतम लाभ उठा सकें।
कृषि सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारी केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि गांवों और खेतों तक पहुंचें। सरकार की योजनाओं और नीतियों को धरातल पर लागू करने में जिला स्तर के अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए किसानों की वास्तविक जरूरतों को समझकर उनके अनुरूप काम करना आवश्यक है।

मृदा स्वास्थ्य और परती भूमि के उपयोग पर विशेष जोर
इस वर्ष की राज्य स्तरीय रबी कर्मशाला दो प्रमुख विषयों—खेत बचाओ अभियान और रबी फसल उत्पादन—पर केंद्रित है। कृषि सचिव ने बताया कि प्रत्येक वर्ष रबी कर्मशाला में फसल उत्पादकता, फसल सघनता, सिंचाई और बाजार संपर्क जैसे विषयों पर चर्चा होती है।
हालांकि, इस वर्ष खेतों की उर्वरता एवं स्वास्थ्य बनाए रखने, परती भूमि का बेहतर उपयोग करने और उर्वरकों के सीमित एवं सुरक्षित इस्तेमाल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही कृषि उत्पादन बढ़ाने में आने वाली समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान पर भी जोर दिया जा रहा है।

सिंचाई संसाधनों का डेटा अपडेट करने के निर्देश
कृषि सचिव ने सभी जिलों में सिंचाई व्यवस्था से संबंधित अद्यतन आंकड़े तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जिलों में उपलब्ध तालाबों, नहरों और अन्य सिंचाई संसाधनों का संशोधित डेटा अपडेट किया जाना चाहिए।
इसके अलावा, उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित कर किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की जरूरत बताई। उन्होंने फसल उत्पादकता और फसल सघनता बढ़ाने के साथ कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन के लिए बाजार संपर्क मजबूत करने पर भी जोर दिया।
परती भूमि में फसल आच्छादन बढ़ाने की जरूरत
कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने राज्य में परती भूमि का अधिकतम उपयोग करने और वहां फसल आच्छादन का क्षेत्र बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इससे कृषि उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि की जा सकती है।
उन्होंने मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण और सतत कृषि विकास के लिए रासायनिक उर्वरकों के संतुलित एवं विवेकपूर्ण इस्तेमाल पर जोर दिया। साथ ही, सभी पदाधिकारियों और कर्मियों से तकनीकी सत्रों में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की, ताकि विशेषज्ञों के तकनीकी ज्ञान और अनुभव का अधिकतम लाभ मिल सके।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए भूमि संरक्षण जरूरी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति सीएस दुबे ने कहा कि खेत बचाओ अभियान सह रबी कर्मशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों को भूमि के स्वास्थ्य और उसकी उर्वरा शक्ति बनाए रखने के प्रति जागरूक करना है। इससे किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं।
उन्होंने भूमि की उर्वरा शक्ति को लंबे समय तक बनाए रखने के विभिन्न उपायों की जानकारी दी। कुलपति ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाना सरकार का महत्वपूर्ण लक्ष्य है। इसे हासिल करने के लिए कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ भूमि संरक्षण पर भी ध्यान देना जरूरी है।
कृषि विशेषज्ञों ने भी रखे विचार
कर्मशाला में मृदा निदेशक विकास कुमार, निदेशक समिति रमाशंकर प्रसाद और गव्य निदेशक संजीव कुमार सहित विभिन्न कृषि वैज्ञानिकों ने अपने विचार रखे। उन्होंने कृषि विकास, मिट्टी के स्वास्थ्य, फसल उत्पादन और किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की।
कार्यक्रम में कृषि विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी, विभिन्न जिलों के जिला कृषि पदाधिकारी, कृषि एवं संबद्ध विभागों के मुख्यालय और जिला स्तर के अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक तथा अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
