लोहरदगा के हाटी गांव का सूचना पट्ट चर्चा में, ग्राम सभा के फैसले को लेकर शुरू हुई बहस
लोहरदगा: झारखंड के लोहरदगा जिले के हाटी गांव में ग्राम सभा की ओर से लगाया गया एक सूचना पट्ट इन दिनों सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस सूचना पट्ट में धर्मांतरण के उद्देश्य से गांव में आने वाले लोगों और ‘चंगाई सभा’ जैसे आयोजनों को लेकर ग्राम सभा के निर्णय का उल्लेख किया गया है। इस मामले को लेकर कानूनी अधिकारों, पेसा कानून और ग्राम सभा की शक्तियों पर भी बहस तेज हो गई है।
प्रमुख बातें
- लोहरदगा के हाटी गांव में ग्राम सभा की ओर से सूचना पट्ट लगाया गया।
- सूचना पट्ट में धर्मांतरण के उद्देश्य से आने वालों पर रोक संबंधी संदेश लिखा गया है।
- पोस्ट में पेसा कानून और संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला दिया गया है।
- इस विषय पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
- IRS अधिकारी निशा उरांव ने भी इस संबंध में पोस्ट साझा की है।
सूचना पट्ट में क्या लिखा है?
ग्राम सभा की ओर से लगाए गए सूचना पट्ट में कहा गया है कि धर्मांतरण के उद्देश्य से गांव में आने वाले पादरी, पास्टर अथवा अन्य व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक रहेगी। साथ ही ‘चंगाई सभा’ जैसे आयोजनों को गांव में आयोजित नहीं करने की बात भी लिखी गई है। सूचना पट्ट को ग्राम सभा के निर्णय के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा मामला
इस सूचना पट्ट की तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से साझा की जा रही है। कई लोग इसे आदिवासी परंपरा और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण की पहल बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसके कानूनी पहलुओं पर सवाल भी उठा रहे हैं। इसी क्रम में निशा उरांव ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इससे जुड़ी पोस्ट साझा की है।

पेसा कानून और संविधान को लेकर क्या दावा किया जा रहा है?
सोशल मीडिया पर साझा किए गए पोस्ट में दावा किया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 25 तथा पेसा (PESA) कानून के तहत ग्राम सभा को ऐसे निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है। साथ ही यह भी दावा किया गया है कि इस विषय पर पूर्व में सर्वोच्च न्यायालय और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने ग्राम सभा के अधिकारों से जुड़े कुछ निर्णय दिए हैं।
हालांकि, इन कानूनी दावों और न्यायालयों के संदर्भों की स्वतंत्र पुष्टि इस समाचार में नहीं की गई है। किसी भी कानूनी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित न्यायालय के आदेशों और आधिकारिक दस्तावेजों का अध्ययन आवश्यक है।
कई गांवों में ऐसे सूचना पट्ट लगाने की चर्चा
पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि परंपरा और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से झारखंड के अन्य गांवों में भी इसी प्रकार के सूचना पट्ट लगाए जाने की योजना है। फिलहाल इस संबंध में किसी सरकारी विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

