बाबूलाल मरांडी का गंभीर आरोप: “राज्य सरकार अपराध छिपाने के लिए नया अपराध गढ़ रही है”
प्रमुख बिंदु
● मरांडी ने कहा— सरकार अपराध छिपाने के लिए “नए अपराध” गढ़ रही है।
● ED की कार्रवाई में कोयले के धंधे से जुड़े चौंकाने वाले खुलासे।
● आरोप— कुछ शीर्ष पुलिस अधिकारी कोयला माफियाओं को हत्या का टारगेट दे रहे हैं।
● दावा— ED जिनसे पूछ रही है, उन्हीं को खत्म करने की साजिश।
● कहा— सबूतों को “एनकाउंटर” में मिटाने का खेल पहले भी हुआ है।
● चेतावनी— ED को सतर्क रहने की जरूरत, सच पूछने वाले खतरे में।
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मरांडी ने सरकार पर लगाया बड़ा आरोप
रांची- भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में अपराध को छिपाने के लिए “नया अपराध गढ़ना” अब व्यवस्था की आदत बन चुका है। उन्होंने दावा किया कि सत्ता और सिस्टम मिलकर सत्य को दबाने का प्रयास कर रहे हैं।
धनबाद के कोयला नेटवर्क में ED की कार्रवाई से खुलासे
मरांडी ने कहा कि धनबाद के कोयला कारोबार के काले नेटवर्क पर हुई ED की हालिया छापेमारी ने कई चौंकाने वाले सबूत उजागर किए हैं। लेकिन इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि कोयले की काली कमाई से लाल होते कुछ शीर्ष पुलिस अधिकारी अब खुद माफियाओं को “उनके जमीनी गुर्गों को खत्म करने” का टारगेट दे रहे हैं।
“ED से पूछताछ करवाने वालों की हत्या की साजिश”
मरांडी ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि स्पष्ट जानकारी मिली है कि जिन लोगों से ED पूछताछ कर रही है, उन्हें ही खत्म करने की योजना रची जा रही है ताकि सच सामने न आ सके। उन्होंने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है; राज्य में पहले भी “अपराधियों को पकड़ने के नाम पर सबूतों का एनकाउंटर” कराने के उदाहरण सामने आ चुके हैं।
“राज्य ने एक ऐसे डीजीपी को देखा जिसने सुपारी लेकर एनकाउंटर करवाए”
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि झारखंड एक ऐसे डीजीपी को देख चुका है जिस पर सुपारी लेकर एनकाउंटर करवाने, भ्रष्टाचार के रिकॉर्ड तोड़ने और सत्ताधारी दल के नेताओं तक ने आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सत्ता, पुलिस सिस्टम और माफिया के गठजोड़ की कहानी किसी से छिपी नहीं है।
“जहां सच दबाने वालों का राज हो, वहां न्याय औपचारिकता बन जाता है”
मरांडी ने कहा कि झारखंड में हालात इतने गंभीर हैं कि सच बोलने वालों को नहीं, सच दबाने वालों को संरक्षण मिलता है। उन्होंने चेतावनी दी कि ED को बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है, क्योंकि जब सत्ता, सिस्टम और माफिया एक ही धुरी पर घूमने लगते हैं, तो न्याय का गला घोंटना मात्र औपचारिकता रह जाती है।
