भादर मिलन समारोह: युवाओं को संस्कृति से जोड़ने और भाषा बचाने का आह्वान.

झारखंड/बिहार

बुंडू में मनाया गया चौथा भादर मिलन समारोह, पंचपरगनिया भाषा और संस्कृति के संरक्षण का संकल्प

प्रमुख बिंदु

  • सूर्य मंदिर बुंडू परिसर में चौथा भादर मिलन समारोह 2025 आयोजित

  • कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक पूजा और वंदना गीत से हुई

  • अतिथियों ने भाषा और संस्कृति संरक्षण पर दिया जोर

  • युवाओं को संस्कृति से जोड़ने और गांव-गांव में अखड़ा निर्माण की अपील

  • छात्रों ने गीत-नृत्य प्रस्तुत कर पंचपरगनिया संस्कृति का संदेश दिया



पारंपरिक अंदाज में हुआ शुभारंभ

रांची, 8 सितंबर 2025- बुंडू स्थित सूर्य मंदिर परिसर में पंचपरगनिया भाषा प्रेमियों द्वारा चौथा भादर मिलन समारोह 2025 का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक पूजा और राजकिशोर स्वांसी व पुरेंद्र नाथ अहीर द्वारा प्रस्तुत वंदना गीत से की गई। समारोह की अध्यक्षता शिक्षक डॉ. गोविन्द महतो ने की।

मुख्य अतिथि का संदेश: युवाओं को संस्कृति से जोड़ना जरूरी

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. करमचंद्र अहीर (सचिव, पंचपरगनिया भाषा विकास केंद्रीय समिति) ने युवाओं से अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पांच परगना क्षेत्र के हर गांव में अखड़ा का निर्माण जरूरी है, तभी हमारी विलुप्त होती कला और संस्कृति को सुरक्षित रखा जा सकेगा।

पंचपरगनिया समेत 9 भाषाओं का उत्सव

डीएसपीएमयू रांची के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के समन्वयक सह खोरठा विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि पंचपरगनिया भाषा का यह समारोह वास्तव में टीआरएल की 9 भाषाओं का उत्सव है। उन्होंने बताया कि ऐसे सांस्कृतिक मंच युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने और कला-संस्कृति सीखने का अवसर प्रदान करते हैं।

साहित्य और शिक्षा पर बल

स्नातकोत्तर पंचपरगनिया विभागाध्यक्ष डॉ. तारकेश्वर सिंह मुंडा ने साहित्यिक और शैक्षणिक विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को पंचपरगनिया भाषा में शिक्षकों की बहाली करनी चाहिए। वर्तमान में माध्यमिक आचार्य में केवल 10 सीटें मिलना बेहद दुखद है। भाषा अभी शैशवकाल में है और इसे आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

कला और एकजुटता पर विशेष जोर

पीपीके कॉलेज के मुंडारी विभागाध्यक्ष डॉ. लखींद्र मुंडा ने कहा कि भाषा और कला को बचाए रखना समय की मांग है। उन्होंने इस पर आधारित गीत भी प्रस्तुत किया। शारीरिक शिक्षक सुरेश चंद्र महतो ने भादर मिलन को एकजुटता का प्रतीक बताया। वहीं, कुड़माली विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष भूतनाथ प्रमाणिक ने सरकार द्वारा पंचपरगनिया भाषा की उपेक्षा पर नाराजगी जताई और शिक्षक बहाली की मांग दोहराई।

छात्र-छात्राओं ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय रांची, पांच परगना किसान महाविद्यालय बुंडू, डोरंडा कॉलेज रांची, सिल्ली कॉलेज सिल्ली, महिला महाविद्यालय रांची और रांची विश्वविद्यालय के छात्रों ने पारंपरिक गीत और नृत्य प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों ने पंचपरगनिया संस्कृति की जीवंत झलक दिखाई।

साहित्यकारों और समाजसेवियों की गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम में पंचपरगनिया साहित्यकार गोरेन्द्रनाथ गोंझू, डॉ. वासुदेव महतो, जयप्रकाश उरांव, कृष्ण सिंह मुंडा सहित अनेक बुद्धिजीवी, समाजसेवी और भाषा-प्रेमी शामिल हुए।

समापन और आभार

समारोह का समापन सामूहिक गीत के साथ हुआ। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए विद्यासागर यादव ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और पंचपरगनिया भाषा-संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्प लिया।

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