400 साल पुराने किले में अब क्या बदलेगा? सामने आया बड़ा प्लान

झारखंड/बिहार विधानसभा चुनाव

पलामू किला बनेगा पर्यटन का नया केंद्र! 60 करोड़ की योजना पर तेज हुई कवायद, 2028 तक जीर्णोद्धार का लक्ष्य

पलामू के ऐतिहासिक किले को नया स्वरूप देने की दिशा में राज्य सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। पलामू किला के जीर्णोद्धार कार्य को जल्द शुरू कराने के उद्देश्य से झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर और क्षेत्रीय विधायक रामचंद्र सिंह ने पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू से उनके सरकारी आवास स्थित कार्यालय में मुलाकात की। इस दौरान पर्यटन विभाग द्वारा तैयार की जा रही योजना का विस्तृत पावरपॉइंट प्रस्तुतिकरण भी दिखाया गया।

प्रमुख बातें

  • पलामू किला के जीर्णोद्धार को लेकर पर्यटन विभाग की तैयारी तेज
  • 50 से 60 करोड़ रुपये तक खर्च होने की संभावना
  • विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार करने का कार्य जारी
  • 2028 तक जीर्णोद्धार कार्य पूरा करने का लक्ष्य
  • किले में लाइट एंड साउंड शो और सौंदर्यीकरण की भी योजना
  • ट्राइबल होम स्टे मॉडल के जरिए पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर

DPR तैयार होने के बाद शुरू होगी निविदा प्रक्रिया

बैठक में पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने बताया कि पलामू किला के जीर्णोद्धार के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार कराया जा रहा है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार इस परियोजना पर लगभग 50 से 60 करोड़ रुपये खर्च किए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि DPR तैयार होने के बाद जीर्णोद्धार कार्य के लिए निविदा आमंत्रित की जाएगी, ताकि परियोजना को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।

2028 तक पूरा हो काम: वित्त मंत्री

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बैठक में मौजूद विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि हर हाल में वर्ष 2028 तक पलामू किला के जीर्णोद्धार का कार्य पूरा कर लिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह केवल एक ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण नहीं, बल्कि पलामू और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का भी महत्वपूर्ण अवसर है।

400 वर्षों से अधिक पुराना है पलामू किला

बैठक के दौरान वित्त मंत्री ने पलामू किला के ऐतिहासिक महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पलामू किला व्याघ्र अभयारण्य क्षेत्र के भीतर स्थित है और इसका इतिहास चेरो वंश से जुड़ा हुआ है।

इतिहास के अनुसार वर्ष 1628 में चेरो वंश के राजा प्रताप राय ने किले का निर्माण कराया था। इसके बाद वर्ष 1658 में राजा मेदिनी राय ने नए किले के निर्माण की शुरुआत की, हालांकि वह कार्य पूर्ण नहीं हो सका।

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लाइट एंड साउंड शो से बढ़ेगा आकर्षण

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर और विधायक रामचंद्र सिंह ने सुझाव दिया कि जीर्णोद्धार के बाद किले का व्यापक सौंदर्यीकरण किया जाए। इसके साथ ही पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए आधुनिक लाइट एंड साउंड शो जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएं।

उनका मानना है कि इससे पलामू किला राष्ट्रीय स्तर के पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना सकेगा।

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ट्राइबल होम स्टे मॉडल पर भी सरकार का फोकस

बैठक में आदिवासी संस्कृति और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने ट्राइबल होम स्टे जैसी योजनाओं को बढ़ावा देने का सुझाव दिया।

इस मॉडल के तहत पर्यटक स्थानीय आदिवासी परिवारों के बीच रहकर उनकी संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को करीब से जान सकेंगे। साथ ही प्राकृतिक वातावरण का अनुभव भी कर पाएंगे। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर मिलने की संभावना है।

पर्यटन और रोजगार दोनों को मिलेगा लाभ

पलामू किला के जीर्णोद्धार और उससे जुड़ी पर्यटन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को नया बल मिलेगा। इससे न केवल राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण होगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

राज्य सरकार की यह पहल पलामू को झारखंड के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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