गुमला में सड़क के अभाव ने ली गर्भवती और नवजात की जान, सरकार पर उठे सवाल.

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मुख्य बिंदु-
• गुमला के झलकापाठ गांव में सड़क के अभाव में इलाज में देरी से मौत
• 19 साल की गर्भवती सुकरी कुमारी और नवजात ने तोड़ा दम
• बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए
• आदिवासी बहुल इलाकों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

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गुमला में दर्दनाक घटना, मां और बच्चे की मौत

रांची- झारखंड के गुमला जिले के झलकापाठ गांव में इलाज में देरी के कारण 19 वर्षीय गर्भवती सुकरी कुमारी और उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई। गांव तक सड़क नहीं होने के कारण गंभीर हालत में सुकरी कुमारी को बहंगी में लादकर अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही स्थिति और बिगड़ गई और दोनों की जान नहीं बचाई जा सकी।

सड़क और स्वास्थ्य सुविधा की कमी बनी मौत की वजह

स्थानीय हालात के अनुसार गांव से अस्पताल तक पक्की सड़क नहीं है। इसी कारण एंबुलेंस या अन्य वाहन समय पर नहीं पहुंच सके। ग्रामीणों को मजबूरी में गर्भवती महिला को बहंगी में उठाकर अस्पताल ले जाना पड़ा। इलाज में हुई इसी देरी को मौत का प्रमुख कारण माना जा रहा है।

बाबूलाल मरांडी का सरकार पर तीखा हमला

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस घटना को साझा करते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड में, खासकर आदिवासी बहुल इलाकों में, ऐसी घटनाएं रोज कहीं न कहीं सामने आ रही हैं। बेटियां और बहनें किस दर्द से गुजरती हैं, यह सोच पाना भी मुश्किल है।

मुख्यमंत्री की चुप्पी पर उठे सवाल

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं के बाद भी सरकार की ओर से न संवेदना दिखाई जाती है और न ही ठोस कार्रवाई होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अब मानवीय संवेदनाओं से भी रिक्त होती जा रही है।

पहले से चिन्हित होनी चाहिए थीं संवेदनशील जगहें

मरांडी ने कहा कि जिन इलाकों में पहले भी खाट या बहंगी पर मरीजों को अस्पताल ले जाने की घटनाएं हो चुकी हैं, वहां आवागमन की सुगम व्यवस्था सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए थी। हर गर्भवती महिला और गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति की ऐसी मौत सरकार की असफलता को उजागर करती है।

भविष्य को लेकर चेतावनी

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि ऐसी घटनाएं भी जनप्रतिनिधियों को झकझोरने में असफल रहीं, तो झारखंड का भविष्य गंभीर खतरे में पड़ सकता है।

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