रांची पुलिस लाइन में 10 पुलिसकर्मी जुआ खेलते पकड़े गए, बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर बोला हमला; पुलिस व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में पुलिस विभाग के भीतर अनुशासनहीनता का मामला सामने आने के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है। कांके रोड स्थित पुलिस लाइन में जुआ खेलने के आरोप में 10 पुलिसकर्मियों को पकड़े जाने और निलंबित किए जाने के मामले पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार को घेरा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर झारखंड की पुलिस व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और सरकार की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
प्रमुख बातें
- रांची पुलिस लाइन में जुआ खेलने के आरोप में 10 पुलिसकर्मी पकड़े गए।
- SSP राकेश रंजन ने सभी 10 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया।
- नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर साधा निशाना।
- पुलिस विभाग में अनुशासनहीनता और प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए सवाल।
- ट्रांसफर-पोस्टिंग में कथित लेन-देन और राजनीतिक संरक्षण का लगाया आरोप।
- सरकारी पुलिसकर्मियों और होमगार्ड जवानों से निजी काम कराने का भी दावा।
पुलिस लाइन में जुआ खेलते पकड़े गए 10 पुलिसकर्मी
रांची के कांके रोड स्थित पुलिस लाइन परिसर में जुआ खेलने की शिकायतों के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर विशेष टीम ने छापेमारी की थी। इस दौरान कथित तौर पर 10 पुलिसकर्मियों को जुआ खेलते पकड़ा गया। मामले में सभी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। मामले की पुष्टि सार्जेंट मेजर आनंद राज खलखो ने की है।
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बाबूलाल मरांडी ने पुलिस व्यवस्था पर उठाए सवाल
इस घटना को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने अपनी पोस्ट में पुलिस विभाग की कार्यशैली पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कानून की रक्षा करने वाले पुलिसकर्मी ही कानून के खिलाफ गतिविधियों में शामिल पाए जाएंगे, तो राज्य में कानून-व्यवस्था और अनुशासन कैसे कायम रहेगा?
मरांडी ने अपनी पोस्ट में थानों में महिलाओं के साथ कथित आपराधिक घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने पुलिस व्यवस्था की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) की प्रतिक्रिया और पुलिस मुख्यालय की भूमिका को लेकर भी निशाना साधा।
मुख्यमंत्री आवास से पुलिस व्यवस्था संचालित होने का आरोप
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि झारखंड में पुलिस व्यवस्था की कमान पुलिस मुख्यालय के बजाय मुख्यमंत्री आवास में बैठे एक सिपाही के हाथों में है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था पर भ्रष्ट अधिकारियों और दलाल-बिचौलियों का प्रभाव बढ़ रहा है।
मरांडी ने ट्रांसफर-पोस्टिंग में कथित पैसों के लेन-देन का आरोप लगाते हुए कहा कि पैसे देकर पदस्थापन पाने वाले अधिकारी खुद को सरकार से ऊपर समझने लगे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कथित लेन-देन के कारण सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं कर पा रही है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में पोस्ट में कोई दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।
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अधिकारियों पर सरकारी कर्मचारियों से निजी काम कराने का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने अपनी पोस्ट में सरकारी संसाधनों के कथित दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने दावा किया कि राज्य के कई छोटे-बड़े अधिकारियों ने अपने घरों और रिश्तेदारों के यहां पुलिसकर्मियों तथा होमगार्ड जवानों को घरेलू कामकाज में लगा रखा है।
उन्होंने एक वरिष्ठ अधिकारी पर 50 से अधिक सरकारी कर्मचारियों को अपने व्यावसायिक खटाल के संचालन में लगाने का भी आरोप लगाया है। मरांडी ने सवाल उठाया कि यदि सरकारी कर्मचारियों का इस्तेमाल निजी कार्यों में हो रहा है, तो इस पर सरकार और पुलिस मुख्यालय कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं?
पुलिस विभाग और सरकार की जवाबदेही पर सवाल
बाबूलाल मरांडी ने अपनी पोस्ट के जरिए राज्य की पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था पर व्यापक सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जब सत्ता का संरक्षण ही भ्रष्टाचार का आधार बन जाएगा, तो व्यवस्था में अनुशासन और कानून का राज कैसे कायम रहेगा?
फिलहाल पुलिस लाइन में जुआ खेलने के मामले में 10 पुलिसकर्मियों के निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है। वहीं, मरांडी की ओर से लगाए गए ट्रांसफर-पोस्टिंग, सरकारी कर्मचारियों के निजी इस्तेमाल और राजनीतिक संरक्षण से जुड़े आरोपों पर संबंधित अधिकारियों तथा राज्य सरकार का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
