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“अब बिना संघर्ष नहीं मिलेगा न्याय” — शिक्षकों ने कहा, इस बार घेराव ऐतिहासिक होगा.

झारखंड/बिहार रोज़गार समाचार

झारखंड अधिविद्य परिषद के खिलाफ मोर्चा हुआ आक्रोशित

रांची- वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने घोषणा की है कि, वह नवंबर माह के दूसरे सप्ताह में जैक (झारखंड अधिविद्य परिषद) कार्यालय का घेराव करेगा। यह निर्णय आज आयोजित बैठक में लिया गया, जिसमें इंटरमीडिएट, उच्च विद्यालय, संस्कृत विद्यालय और मदरसा विद्यालयों के प्राचार्य, प्रधानाचार्य और शिक्षक प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए।

बैठक में मोर्चा के नेताओं ने आरोप लगाया कि जैक किसी भी कार्य को अधिनियम और नियमावली के अनुसार नहीं कर रहा है, जिसके कारण राज्य के सैकड़ों विद्यालयों को आर्थिक, प्रशासनिक और शैक्षणिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

जैक पर गंभीर आरोप — नियमों की अनदेखी और अनुदान रोकने का मामला

मोर्चा ने कहा कि अधिनियम में यह स्पष्ट है कि जैक को हर तीन माह में बैठक करनी चाहिए, लेकिन पिछले 5 महीनों से एक भी बोर्ड बैठक नहीं हुई। इसके अलावा, समय पर शासी निकाय (Governing Body) का गठन नहीं किए जाने से 2024-25 के वित्तीय वर्ष में 30 से अधिक विद्यालयों का अनुदान अस्वीकृत कर दिया गया।

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मोर्चा के मुताबिक, वर्तमान में 23 विद्यालयों के अनुदान अब भी जैक की देरी और अस्पष्टता के कारण रुके हुए हैं। परिषद यह स्पष्ट नहीं कर रही है कि किन संस्थानों की अवधि विस्तार की प्रक्रिया पूरी हुई है और किनकी नहीं।

गवर्निंग बॉडी के गठन में देरी और “अनुमोदन” के नाम पर खेल

मोर्चा ने जैक पर “अनुमोदन प्रक्रिया” के नाम पर जानबूझकर 6-6 महीने की देरी करने का आरोप लगाया। नेताओं ने कहा कि दानदाता, शिक्षक प्रतिनिधि या सचिव की स्वीकृति देने का अधिकार अधिनियम में कहीं नहीं लिखा है, फिर भी जैक द्वारा इस प्रक्रिया को भ्रष्टाचार का माध्यम बना दिया गया है, जिससे स्कूलों को जानबूझकर परेशान किया जाता है।

मोर्चा ने यह भी कहा कि अधिनियम में जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को जांच संयोजक बनाने का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन परिषद जानबूझकर उन्हें यह भूमिका दे देती है, जिससे जांच रिपोर्ट में अनावश्यक देरी होती है और प्रधानाचार्यों को परेशान किया जाता है।

सेवा शर्त नियमावली और पाठ्यक्रम पर भी ठप काम

मोर्चा ने आरोप लगाया कि इंटर कॉलेज, संस्कृत, मदरसा और उच्च विद्यालयों के सेवा शर्त नियमावली लंबे समय से जैक में लंबित हैं। कई बार आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक नियमावली तैयार नहीं की गई है। इसके अलावा, पाठ्यक्रम सुधार और परीक्षा पैटर्न पर भी कोई बैठक नहीं हुई है, जबकि सीबीएसई हर तीन माह में अपने पाठ्यक्रम की समीक्षा करता है।

शिक्षकों का बड़ा आंदोलन तय — “अब निर्णायक लड़ाई”

बैठक में निर्णय लिया गया कि नवंबर के दूसरे सप्ताह में राज्यभर के शिक्षक और कर्मचारी अपने संस्थान बंद रखकर जैक कार्यालय का घेराव करेंगे और अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठेंगे।
मोर्चा के नेताओं ने कहा कि दशहरा बीत जाने के बावजूद अनुदान जारी नहीं हुआ, जिससे शिक्षकों को आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है।

बैठक में चंदेश्वर पाठक, अरविंद सिंह, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, गणेश महतो, संजय कुमार, देवनाथ सिंह, मनीष कुमार और नरोत्तम सिंह ने कहा कि यह घेराव ऐतिहासिक होगा और इसमें महिला शिक्षिकाओं की भी भारी भागीदारी रहेगी।

75% अनुदान वृद्धि और राज्यकर्मी दर्जे की मांग पर एकजुट शिक्षक

मोर्चा ने बैठक में 75% अनुदान वृद्धि के मुद्दे पर भी गहन विमर्श किया। नेताओं ने कहा कि शिक्षा सचिव ने पहले आश्वासन दिया था कि इस प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री से शीघ्र विमर्श होगा, लेकिन डेढ़ माह बीत जाने के बावजूद कोई प्रगति नहीं हुई

छठ पर्व के बाद मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से मुलाकात करेगा और कैबिनेट में इस प्रस्ताव को रखने की मांग करेगा। साथ ही, मोर्चा ने घोषणा की कि वह राज्यकर्मी का दर्जा पाने के लिए 10 नवंबर को राज्यस्तरीय बैठक बुलाएगा, जिसमें निर्णायक आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।

उच्च न्यायालय में रिट और आंदोलन की तैयारी

मोर्चा ने बताया कि 75% अनुदान वृद्धि को लेकर माननीय उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की गई है, जिसकी सुनवाई 20 नवंबर को होनी है। साथ ही राज्यकर्मी दर्जे की मांग को लेकर भी अलग रिट दाखिल करने का निर्णय लिया गया है।

मोर्चा नेताओं ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो कांग्रेस अध्यक्ष और सम्मानित विधायकों को साथ लेकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।

नेताओं के बयान — “अब बिना संघर्ष न्याय नहीं मिलेगा”

मोर्चा के नेताओं रघुनाथ सिंह, अरविंद सिंह, देवनाथ सिंह, गणेश महतो और अन्य ने कहा कि अब निर्णायक संघर्ष का समय आ गया है।
उन्होंने कहा कि “बिहार की तर्ज पर वेतनमान देने तक आंदोलन जारी रहेगा। सरकार को अब शिक्षकों की आवाज सुननी ही होगी।”

बैठक का संचालन और कमेटी का गठन

बैठक की अध्यक्षता हरिहर प्रसाद कुशवाहा ने की, जबकि संचालन अरविंद सिंह ने किया। बैठक में 500 से अधिक प्राचार्य, प्रधानाचार्य और शिक्षक प्रतिनिधि शामिल हुए। मोर्चा के कार्यों के संचालन के लिए एक नई समन्वय समिति बनाई गई, जिसमें कुंदन कुमार सिंह, अरविंद सिंह, मुरारी सिंह, देवनाथ सिंह, गणेश महतो और नरोत्तम सिंह को संयोजक बनाया गया। बैठक की जानकारी मनीष कुमार और अरविंद सिंह ने प्रेस को दी।

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