रोम से आदिवासी समुदाय की ऐतिहासिक तीर्थयात्रा: असीसी में शांति और एकता की प्रार्थना
रोम,
रोम में रहने वाले अखिल भारतीय आदिवासी समुदाय (ABHAS) के सदस्यों ने रविवार को एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक तीर्थयात्रा पूरी की। समुदाय के अध्यक्ष फादर विजय टोप्पो की अगुवाई में 46 श्रद्धालु लगभग 190 किलोमीटर दूर स्थित असीसी (Assisi) पहुँचे—जो शांति, त्याग और सेवा के प्रतीक संत फ्रांसिस की जन्मभूमि और कर्मभूमि है।

इस यात्रा को आभास समुदाय के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार रोम में रहने वाले आदिवासी भाई-बहनों ने एक साथ रोम से बाहर निकलकर सामूहिक आध्यात्मिक यात्रा की।
शांति के लिए सामूहिक प्रार्थना
तीर्थयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने
रोज़री माला जपते हुए
भजन गाते हुए
और वैश्विक शांति के लिए प्रार्थना करते हुए
पूरी यात्रा को आध्यात्मिक रंग से भर दिया।
असीसी पहुँचकर सभी ने संत फ्रांसिस की प्रसिद्ध प्रार्थना—
“प्रभुवर, मुझे अपनी शांति का प्रचारक बना”
को अत्यंत भावपूर्ण स्वर में गाया।
असीसी के पवित्र स्थलों का दर्शन
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने
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संत फ्रांसिस के जन्मस्थान
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उनकी पवित्र कब्र
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संत दामियन
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संत क्लारा
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और युवा संत कार्लो अकुतिस
के समाधि-स्थलों का दर्शन किया।
इन पवित्र स्थलों ने सभी को संतों के प्रेरणादायक और साहसिक जीवन से रूबरू कराया।
पवित्र मिस्सा और संदेश
तीर्थयात्रा का समापन पवित्र मिस्सा (Holy Mass) के साथ हुआ, जिसकी अध्यक्षता फादर ख्रिस्ती (येसु समाज) ने की।
अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि आज की दुनिया को शांति, प्रेम और समर्पण की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया—
“संत फ्रांसिस से प्रेरणा लेकर विश्व में शांति का दूत बनें।”
इस यात्रा में संत जेवियर कॉलेज, रांची के प्रिंसिपल फादर रोबर्ट प्रदीप कुजूर, एस.जे. भी शामिल रहे, जिसने इस आध्यात्मिक आयोजन को और विशेष बना दिया।
