बरहेट में SIR के दौरान मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी को लेकर भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

मिता देवी बनीं फातिमा बीबी? बरहेट की वोटर लिस्ट पर BJP ने उठाए सवाल

झारखंड/बिहार राष्ट्रीय ख़बर विधानसभा चुनाव

बरहेट में SIR के दौरान वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप, भाजपा ने मांगी उच्चस्तरीय जांच

साहिबगंज जिले के बरहेट में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) के दौरान मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद झारखंड की राजनीति गरमा गई है। भाजपा ने इस मामले को निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूची की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं SIR के प्रदेश संयोजक राकेश प्रसाद ने झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

प्रमुख बातें

  • बरहेट में SIR के दौरान मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी का मामला।
  • मिता देवी का नाम फातिमा बीबी के रूप में दर्ज होने का आरोप।
  • पिता के नाम की जगह नेजामुद्दीन मोमिन का नाम दर्ज होने की शिकायत।
  • एक ही आधार संख्या पर अलग-अलग नामों से दस्तावेज तैयार करने का आरोप।
  • भाजपा ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
  • राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी संदिग्ध संशोधनों की जांच कराने की मांग।

बरहेट में मतदाता पहचान को लेकर गंभीर शिकायत

भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद ने 31 अक्टूबर 2026 को विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों का हवाला देते हुए बरहेट में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, इस मामले में मिता देवी का नाम मतदाता सूची में फातिमा बीबी के रूप में दर्ज पाया गया है। वहीं, उनके पिता के नाम के स्थान पर नेजामुद्दीन मोमिन का नाम दर्ज होने की बात भी सामने आई है।
इसके अलावा, एक ही आधार संख्या पर दो अलग-अलग नामों से दस्तावेज तैयार किए जाने की शिकायत ने मामले को और गंभीर बना दिया है। भाजपा का कहना है कि यदि शिकायतों की पुष्टि होती है तो यह केवल नाम या विवरण में सामान्य त्रुटि का मामला नहीं होगा, बल्कि मतदाता सूची की शुद्धता और निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।

56 हजार से ज्यादा आपत्तियां! झारखंड SIR का नया बुलेटिन जारी

‘यह सामान्य लिपिकीय त्रुटि नहीं, निर्वाचन प्रक्रिया का सवाल’

राकेश प्रसाद ने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है। इसलिए इसमें किसी भी तरह की हेराफेरी, फर्जीवाड़ा या जानबूझकर नामों में बदलाव को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि SIR का मूल उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है। ऐसे में पुनरीक्षण के दौरान इस तरह की शिकायतें सामने आना गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर मतदाता सूची में इस प्रकार के बदलाव कैसे हुए? संबंधित दस्तावेज किसने तैयार किए और इस पूरे प्रकरण में किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही? भाजपा ने इन सभी बिंदुओं की जांच कराने की मांग की है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से पांच बड़ी मांगें

इस मामले में भाजपा ने झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पार्टी की प्रमुख मांगों में संबंधित मतदाताओं के दस्तावेजों और आधार संख्या का सत्यापन, मतदाता सूची में किए गए संदिग्ध संशोधनों की जांच और दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया की पड़ताल शामिल है।
इसके साथ ही राकेश प्रसाद ने कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

क्या झारखंड में BJP ने शुरू कर दी बड़ी सियासी तैयारी? 2 नवंबर से अभियान

पूरे झारखंड में जांच कराने की मांग

भाजपा ने केवल बरहेट तक जांच सीमित रखने के बजाय राज्य के दूसरे क्षेत्रों में भी इसी तरह की संभावित अनियमितताओं की पड़ताल कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से नहीं हटे और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम शामिल न हो।
अब इस मामले में निर्वाचन विभाग की जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, फिलहाल ये आरोप भाजपा की ओर से उठाए गए हैं। इनकी पुष्टि निष्पक्ष जांच और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही हो सकेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *