झारखंड में शिक्षा व्यवस्था पर संकट: जैक अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की नियुक्ति अधर में.

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बोर्ड परीक्षाएं नजदीक, लेकिन नेतृत्वहीन जैक

झारखंड में मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 11 फरवरी से शुरू होनी हैं, लेकिन राज्य की परीक्षा संचालन संस्था, झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC), में अब तक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो पाई है। सरकार इस मामले में कोई अंतिम निर्णय नहीं ले पाई है, जिससे परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

करीब 8 लाख छात्र इस परीक्षा में शामिल होने जा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें अपने एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का विकल्प भी नहीं मिला है। इस अव्यवस्था के बीच रांची जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने केंद्र अधीक्षकों के साथ बैठक कर परीक्षा संचालन को लेकर 31 निर्देश जारी किए हैं। परीक्षा केंद्रों पर प्रश्न पत्रों के पैकेट खोलने की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी ताकि किसी तरह की अनियमितता न हो।

प्रशासनिक नियुक्तियों में देरी से सरकारी व्यवस्था प्रभावित

झारखंड में केवल जैक ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण संस्थान भी नेतृत्वहीन हैं। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में अगस्त से अध्यक्ष का पद खाली पड़ा है। इसी तरह सूचना आयुक्त का पद भी लंबे समय से रिक्त है और यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। सरकार ने अदालत में दो सप्ताह के भीतर नियुक्ति करने का आश्वासन दिया है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

सरकार की निष्क्रियता से छात्रों और प्रशासन पर दबाव

शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था में इन नियुक्तियों का अभाव गंभीर चिंता का विषय है। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के बावजूद, छात्रों और शिक्षकों को असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, प्रशासन पर भी अतिरिक्त दबाव बन रहा है कि बिना स्पष्ट नेतृत्व के परीक्षा को सफलतापूर्वक संपन्न कराया जाए।

अगर समय रहते सरकार ने इन महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां नहीं कीं, तो झारखंड की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर और भी गंभीर असर पड़ सकता है.

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