PGT शिक्षकों को मरणशील कैडर घोषित करना अन्यायपूर्ण: शिक्षक संघ ने सौंपा ज्ञापन.

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झारखंड प्लस टू शिक्षक संघ का शिक्षा विभाग पर हमला, “PGT-TGT शिक्षकों को किया जा रहा है उपेक्षित”

प्रमुख बिंदु:

  • नई नियमावली से PGT शिक्षकों की पदोन्नति की संभावना खत्म

  • विभागीय नीतियों को बताया गया “पॉलिसी पैरालिसिस”

  • शिक्षा सचिव और मुख्य सचिव को सौंपा गया ज्ञापन

  • स्थायी प्रधानाचार्य की नियुक्ति अगले 10 वर्षों तक संभव नहीं

  • न्यायालय से लेकर सड़क तक संघर्ष का एलान



नई नियमावली से शिक्षकों में आक्रोश, संघ ने कहा – खत्म हो रहा है PGT शिक्षकों का भविष्य

झारखंड के सरकारी प्लस टू (+2) विद्यालयों में कार्यरत पीजीटी और टीजीटी शिक्षकों के भविष्य को लेकर संकट गहराता जा रहा है। सरकार द्वारा लाई गई नई नियुक्ति नियमावली के खिलाफ झारखंड प्लस टू शिक्षक संघ ने मोर्चा खोलते हुए विभागीय नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

संघ के प्रांतीय अध्यक्ष योगेंद्र प्रसाद ठाकुर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधान शिक्षा सचिव और मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों को विस्तार से रखा। संघ ने बताया कि सरकार द्वारा पीजीटी और टीजीटी पदों को “मरणशील कैडर” (Dying Cadre) घोषित कर देना शिक्षकों के अधिकारों का हनन है।

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शिक्षकों की पदोन्नति पर पूर्णविराम?

संघ का आरोप है कि झारखंड सरकार द्वारा लाई गई माध्यमिक आचार्य एवं प्रधानाचार्य नियुक्ति नियमावली 2025 के तहत अब PGT शिक्षकों को विद्यालय प्रधान के रूप में पदोन्नत करने का अवसर नहीं मिलेगा। इसके चलते शिक्षक लंबे समय तक उसी पद पर जमे रहेंगे, जिससे उनमें निराशा फैलेगी और शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

प्रांतीय संरक्षक सुनील कुमार ने स्पष्ट कहा, “नई नियमावली के कारण अगले एक दशक तक स्थायी प्रधान की नियुक्ति असंभव हो जाएगी। स्कूल प्रभारी के भरोसे चलेंगे, जिससे अराजकता फैलेगी और शिक्षा की गुणवत्ता गिरेगी।”

विभाग की नीतियों पर संघ का तीखा हमला

प्रांतीय अध्यक्ष योगेंद्र ठाकुर ने विभाग की नीतियों को “पॉलिसी पैरालिसिस” करार देते हुए कहा, “पीजीटी शिक्षकों को विद्यालय प्रधान बनने से वंचित करना न्यायसंगत नहीं है। हम सरकार से अपील करते हैं कि इस अन्यायपूर्ण नीति की तत्काल समीक्षा की जाए।”

प्रांतीय कोषाध्यक्ष उदय शंकर मंडल ने तो यहां तक कह दिया कि संघ इस मसले को न्यायालय से लेकर आंदोलन तक लेकर जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का मनोबल गिराया जा रहा है, जो शिक्षा के लिए घातक है।

अन्य मुद्दों पर भी जताई चिंता

ज्ञापन में केवल पदोन्नति ही नहीं, बल्कि वरिष्ठता के आधार पर वेतनमान, स्थानांतरण नीति, प्रभारी प्रधान को नियमित वेतन, और शिक्षा सेवा संवर्ग निर्माण जैसे कई गंभीर मुद्दे भी शामिल किए गए हैं।

संघ का कहना है कि सरकार वरीय वेतनमान पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दे चुकी है, लेकिन यदि बाकी मुद्दों पर निर्णय नहीं लिया गया, तो शिक्षक संघ सड़कों पर उतरने को तैयार है।

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