जंगलमहल में नारी शक्ति बनी भाजपा की ताकत, चंपाई सोरेन के बयान से बढ़ी चर्चा
आदिवासी महिलाओं की भूमिका को लेकर चंपाई सोरेन का बड़ा दावा
रांची- पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा विधायक Champai Soren ने पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जंगलमहल क्षेत्र के आदिवासी-बहुल गांवों में भाजपा का झंडा मजबूती से थामने वाली सबसे बड़ी ताकत महिलाएं थीं।
चंपाई सोरेन के मुताबिक, गांवों में भाजपा नेताओं के स्वागत से लेकर नुक्कड़ बैठकों और जनसंपर्क अभियानों तक, महिलाओं ने पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने में अहम भूमिका निभाई।
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चुनाव प्रचार में सक्रिय रहे थे चंपाई सोरेन
पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान चंपाई सोरेन ने जंगलमहल क्षेत्र में भाजपा के पक्ष में व्यापक प्रचार-प्रसार किया था। उन्होंने कई आदिवासी इलाकों में सभाएं और जनसंपर्क कार्यक्रम किए थे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि झारखंड और बंगाल के सीमावर्ती आदिवासी क्षेत्रों में चंपाई सोरेन की पकड़ को देखते हुए भाजपा ने उन्हें चुनाव अभियान में प्रमुख जिम्मेदारी दी थी।
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महिलाओं के मुद्दों को बताया समर्थन की बड़ी वजह
चंपाई सोरेन के बयान में यह भी कहा गया कि भाजपा का समर्थन करने वाली कई महिलाएं व्यक्तिगत और सामाजिक समस्याओं से जूझ रही थीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ महिलाओं के परिजन फर्जी मुकदमों में फंसे हुए थे, जबकि कई लोग टीएमसी कार्यकर्ताओं के कथित अत्याचार से परेशान थे। इसके अलावा सामाजिक ढांचे पर बढ़ते अतिक्रमण और बंद होती फैक्ट्रियों के कारण हो रहे पलायन को भी महिलाओं की चिंता का बड़ा कारण बताया गया।
“जब नारी शक्ति ठान लेती है, तब परिवर्तन तय होता है”
चंपाई सोरेन ने कहा कि पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों ने एक बार फिर साबित किया है कि जब नारी शक्ति बदलाव का संकल्प लेती है, तब राजनीतिक परिवर्तन तय हो जाता है।
उन्होंने इसे आदिवासी महिलाओं के आत्मविश्वास, संघर्ष और राजनीतिक भागीदारी का परिणाम बताया।
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बंगाल की राजनीति में जंगलमहल बना अहम क्षेत्र
जंगलमहल क्षेत्र लंबे समय से पश्चिम बंगाल की राजनीति में अहम भूमिका निभाता रहा है। आदिवासी बहुल इस इलाके में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच लगातार राजनीतिक मुकाबला देखने को मिलता रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि महिलाओं और आदिवासी वोटरों की भूमिका आने वाले चुनावों में भी बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकती है।
