JBVNL के कंप्यूटर ऑपरेटरों के वेतन पर उठा सवाल, ‘हाईली स्किल्ड’ श्रेणी में शामिल करने की मांग
रांची, 23 अक्टूबर 2026। झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) में काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों और डाटा एंट्री ऑपरेटरों के वेतन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ ने कर्मचारियों को उनकी वास्तविक कार्यक्षमता और जिम्मेदारियों के अनुरूप वेतन देने की मांग उठाई है। संघ के केंद्रीय अध्यक्ष अजय राय ने इस संबंध में निगम के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (CMD) को ईमेल के जरिए विस्तृत ज्ञापन भेजा है।
प्रमुख बातें
- कंप्यूटर ऑपरेटरों को ‘स्किल्ड’ के बजाय ‘हाईली स्किल्ड’ श्रेणी में रखने की मांग।
- लागू न्यूनतम मजदूरी के अनुसार भुगतान सुनिश्चित करने पर जोर।
- पेरोल और आउटसोर्सिंग से नियुक्त कर्मचारियों के वेतन में अंतर की समीक्षा की मांग।
- कानूनी प्रावधानों और न्यायिक फैसलों के आधार पर मामले का निपटारा करने की अपील।
- संघ ने CMD से समयबद्ध निर्णय और प्रतिनिधियों के साथ बैठक कराने की मांग की।
कंप्यूटर ऑपरेटरों के वेतन में अंतर पर संघ ने उठाए सवाल
झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ का कहना है कि निगम में समान तरह का काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों के वेतन में अंतर होने के कारणों की जांच होनी चाहिए। संघ ने सवाल उठाया है कि जब कर्मचारियों की योग्यता, काम की प्रकृति और जिम्मेदारियां एक जैसी हैं, तो उनके पारिश्रमिक में अंतर किस आधार पर किया जा रहा है।
संघ के अध्यक्ष अजय राय के मुताबिक, केवल इस आधार पर वेतन में अंतर करना उचित नहीं है कि किसी कर्मचारी की नियुक्ति निगम के पेरोल पर हुई है या वह आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से काम कर रहा है। हालांकि, वेतन और सेवा संबंधी लाभों का निर्धारण लागू नियमों तथा कर्मचारियों की वास्तविक सेवा शर्तों के आधार पर किए जाने की जरूरत है।
SAP ERP से लेकर राजस्व रिकॉर्ड तक संभालते हैं कर्मचारी
संघ ने अपने ज्ञापन में कंप्यूटर ऑपरेटरों के काम का उल्लेख करते हुए कहा है कि उनकी जिम्मेदारियां केवल टाइपिंग और सामान्य डाटा एंट्री तक सीमित नहीं हैं। कर्मचारी निगम के तकनीकी, परियोजना, वित्त एवं लेखा, वाणिज्यिक, राजस्व और मानव संसाधन जैसे विभागों में काम करते हैं।
इनके जिम्मे SAP ERP, एडवांस्ड एक्सेल, MIS रिपोर्ट तैयार करना, डाटा की जांच और मिलान, बिलिंग एवं राजस्व रिकॉर्ड का रखरखाव, टेंडर से जुड़े दस्तावेज तैयार करना और विभागीय रिपोर्टिंग जैसे काम भी हैं। संघ का तर्क है कि इन जिम्मेदारियों को देखते हुए कर्मचारियों के कौशल का नए सिरे से आकलन किया जाना चाहिए।
‘हाईली स्किल्ड’ श्रेणी में रखने की मांग
संघ चाहता है कि कंप्यूटर ऑपरेटरों के वास्तविक काम, तकनीकी दक्षता और जिम्मेदारियों की समीक्षा कर उन्हें ‘हाईली स्किल्ड’ श्रेणी में शामिल करने पर निर्णय लिया जाए। इसके साथ ही लागू सरकारी अधिसूचना के अनुसार न्यूनतम मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
संघ का कहना है कि कर्मचारियों की श्रेणी निर्धारित करते समय केवल पदनाम को आधार बनाने के बजाय उनके वास्तविक कार्य और आवश्यक कौशल को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। इस मांग पर अंतिम निर्णय संबंधित नियमों और सक्षम प्राधिकारी के मूल्यांकन के आधार पर होना है।
कानूनी प्रावधानों और अदालती फैसलों का दिया हवाला
अजय राय की ओर से भेजे गए ज्ञापन में Code on Wages (Jharkhand) Rules, 2021 तथा कंप्यूटर ऑपरेटरों और डाटा एंट्री ऑपरेटरों से संबंधित विभिन्न न्यायिक मामलों का उल्लेख किया गया है। इनमें Vibha Lal, Bhaskar Nandan, Premchand Binod Tete, Narendra Kumar और Bipta Oraon से जुड़े मामलों के साथ सर्वोच्च न्यायालय के State of Punjab बनाम Jagjit Singh फैसले का भी संदर्भ दिया गया है।
संघ ने इन कानूनी संदर्भों के आधार पर कर्मचारियों की योग्यता, अनुभव, कार्य की प्रकृति और जिम्मेदारियों का तुलनात्मक परीक्षण करने की मांग की है। इन फैसलों की वास्तविक प्रयोज्यता और कर्मचारियों पर उनका प्रभाव संबंधित तथ्यों तथा लागू कानून के आधार पर तय किया जाना होगा।
बकाया वेतनांतर पर भी निर्णय लेने की मांग
संघ ने निगम से यह भी कहा है कि पेरोल और आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम करने वाले कर्मचारियों के पदनाम, योग्यता, कार्यस्थल, कार्यावधि और जिम्मेदारियों की तुलना की जाए। यदि नियमों के तहत वेतन में संशोधन या अन्य लाभ देय पाए जाते हैं, तो उनकी प्रभावी तिथि और पिछली अवधि के वेतनांतर पर भी फैसला लिया जाए।
संघ का मानना है कि इस मामले को लंबे समय तक लंबित रखने के बजाय तथ्यों और नियमों के आधार पर स्पष्ट निर्णय लिया जाना चाहिए, ताकि कर्मचारियों के बीच वेतन को लेकर बनी असमानता पर स्थिति साफ हो सके।
CMD से बैठक और समयबद्ध आदेश की मांग
झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ ने निगम प्रबंधन से मांग की है कि सक्षम प्राधिकारी मामले की समीक्षा कर कारणों सहित लिखित आदेश जारी करे। साथ ही, संघ के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर मांगों पर चर्चा की जाए और लिए गए निर्णय तथा उनके क्रियान्वयन की जानकारी लिखित रूप में दी जाए।
अजय राय ने कहा है कि कंप्यूटर ऑपरेटर निगम के रोजमर्रा के कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके कौशल और जिम्मेदारियों का उचित मूल्यांकन जरूरी है। संघ ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों को उचित पारिश्रमिक दिलाने के लिए वह इस मुद्दे को प्रबंधन के समक्ष उठाता रहेगा।
फिलहाल, ज्ञापन पर निगम प्रबंधन की ओर से किसी निर्णय या आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी उपलब्ध नहीं है। अब यह देखना होगा कि प्रबंधन कंप्यूटर ऑपरेटरों की श्रेणी, न्यूनतम मजदूरी और वेतन में अंतर से जुड़े सवालों पर क्या कदम उठाता है।
