“बिना चर्चा लाए गए विधेयक”: परिसीमन और सीट बढ़ोतरी पर महासभा ने उठाए सवाल

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परिसीमन और सीट वृद्धि विधेयकों पर झारखंड जनाधिकार महासभा का विरोध

नई दिल्ली/रांची: झारखंड जनाधिकार महासभा ने केंद्र सरकार द्वारा विशेष बजट सत्र (16–18 अप्रैल 2026) में पेश किए गए तीन महत्त्वपूर्ण विधेयकों—परिसीमन, महिला आरक्षण और संसद व विधानसभाओं की सीटों में वृद्धि—का कड़ा विरोध किया है। महासभा ने आरोप लगाया है कि ये प्रस्ताव देश के लोकतांत्रिक ढांचे को प्रभावित कर सकते हैं और इन्हें बिना पर्याप्त सार्वजनिक चर्चा के जल्दबाजी में लाया गया है।

बिना व्यापक चर्चा के विधेयक लाने पर सवाल
महासभा का कहना है कि इतने व्यापक प्रभाव वाले विधेयकों को न तो जनता के बीच चर्चा के लिए रखा गया और न ही राजनीतिक दलों से पर्याप्त परामर्श किया गया। संगठन ने इसे “लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ” बताया है।

महिला आरक्षण के पीछे अन्य उद्देश्य होने का आरोप
सरकार इन विधेयकों को संसद और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण लागू करने के संदर्भ में प्रस्तुत कर रही है। हालांकि महासभा का दावा है कि सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव में वृद्धि का स्पष्ट अनुपात नहीं बताया गया है, जिससे इसके वास्तविक उद्देश्यों पर सवाल उठते हैं।

सीटों की संख्या में प्रस्तावित वृद्धि
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार:
लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव है।
विधानसभाओं की कुल सीटें 4,123 से बढ़ाकर 6,186 करने की बात कही गई है।
महासभा का कहना है कि यदि इसका आधार 2011 की जनगणना को बनाया गया, तो इससे विभिन्न राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व के अनुपात में बदलाव आ सकता है।

परिसीमन प्रक्रिया पर चिंता
महासभा ने परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर भी चिंता जताई है। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि नए प्रावधानों के तहत किसी भी जनगणना के आधार पर कभी भी परिसीमन किया जा सकता है। प्रस्तावित परिसीमन आयोग में:
एक पूर्व सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश
मुख्य चुनाव आयुक्त या उनके प्रतिनिधि
संबंधित राज्य के चुनाव आयोग के प्रतिनिधि
शामिल होंगे। आयोग के निर्णय को न्यायालय में चुनौती देने की अनुमति न होने पर भी संगठन ने सवाल उठाए हैं।
पूर्व उदाहरणों का हवाला

महासभा ने 2023 में जम्मू-कश्मीर और असम में हुए परिसीमन का उदाहरण देते हुए कहा कि चुनावी क्षेत्रों के पुनर्गठन में कई स्थानों पर भौगोलिक निरंतरता का ध्यान नहीं रखा गया। संगठन के अनुसार इससे प्रतिनिधित्व के स्वरूप में बदलाव देखने को मिला।

सूचना और पारदर्शिता पर सवाल
संगठन का आरोप है कि प्रस्तावित कानूनों की विस्तृत जानकारी जनता तक आधिकारिक रूप से नहीं पहुंचाई गई है और लोग केवल मीडिया रिपोर्टों पर निर्भर हैं। इसे उन्होंने “सूचना के अधिकार और पूर्व-विधायी परामर्श नीति का उल्लंघन” बताया।
सरकार से मांगें
झारखंड जनाधिकार महासभा ने निम्न मांगें रखी हैं:
तीनों विधेयकों को वापस लिया जाए।
संसद और विधानसभाओं की वर्तमान सीटों पर ही 33% महिला आरक्षण लागू किया जाए।
परिसीमन और सीट वृद्धि जैसे मुद्दों पर पहले व्यापक सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा की जाए।

संगठन ने जनता और विपक्षी दलों से इन प्रस्तावों के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने की अपील भी की है।

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