JAC में सचिव का पद 10 दिनों से खाली, 50 हजार छात्रों की परीक्षा पर संकट; मोर्चा ने हाईकोर्ट जाने की दी चेतावनी
रांची। झारखंड अधिविद्य परिषद (JAC) में सचिव का पद पिछले 10 दिनों से खाली होने के कारण परिषद के कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वित्तरहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने आरोप लगाया है कि सचिव की नियुक्ति नहीं होने से मध्यमा और मदरसा की परीक्षाएं, स्क्रूटनी, प्रमाणपत्र सत्यापन समेत कई प्रशासनिक कार्य ठप पड़ गए हैं। मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर सचिव की नियुक्ति नहीं की गई तो 16 जून को झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की जाएगी।
प्रमुख बातें
- JAC में सचिव का पद 10 दिनों से खाली
- 16 जून से प्रस्तावित मध्यमा और मदरसा परीक्षा पर संकट
- 50 हजार से अधिक छात्रों का भविष्य प्रभावित होने की आशंका
- स्क्रूटनी, वेरिफिकेशन और विशेष परीक्षाओं का कार्य ठप
- 6 लाख से अधिक छात्रों के प्रमाणपत्र वितरण में देरी
- मोर्चा ने हाईकोर्ट में PIL दायर करने की चेतावनी दी
50 हजार छात्रों की परीक्षा पर मंडरा रहा संकट
मोर्चा के अनुसार 16 जून 2026 से मध्यमा और मदरसा की परीक्षाएं आयोजित होनी हैं। परीक्षा संचालन से जुड़े कई प्रशासनिक और वित्तीय निर्णय सचिव के स्तर पर होते हैं। ऐसे में सचिव की अनुपस्थिति के कारण परीक्षा केंद्रों के संचालन और आवश्यक व्यवस्थाओं पर अनिश्चितता बनी हुई है।
प्रवेश पत्रों पर सचिव के हस्ताक्षर आवश्यक होने के कारण छात्रों को एडमिट कार्ड डाउनलोड करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि JAC ने 12 जून तक समय बढ़ाया है, लेकिन अब तक सचिव की नियुक्ति नहीं होने से चिंता बढ़ गई है।
JAC में कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से रिक्त
मोर्चा ने दावा किया कि JAC में अध्यक्ष को छोड़कर कोई भी पूर्णकालिक पदाधिकारी कार्यरत नहीं है।
- उपाध्यक्ष का पद करीब 18 माह से खाली है।
- दो संयुक्त सचिव पदों में एक पद 30 माह से रिक्त है।
- वर्तमान संयुक्त सचिव अतिरिक्त प्रभार में कार्य कर रहे हैं।
- वित्त पदाधिकारी और अकादमिक पदाधिकारी संविदा पर कार्यरत हैं।
- परीक्षा नियंत्रक का पद पिछले 8 वर्षों से रिक्त है।
मोर्चा का कहना है कि देश के लगभग सभी शिक्षा बोर्ड और विश्वविद्यालयों में नियमित परीक्षा नियंत्रक नियुक्त होते हैं, लेकिन झारखंड के सबसे बड़े परीक्षा बोर्ड में यह पद वर्षों से खाली पड़ा है।
सचिव नहीं होने से ठप पड़े ये महत्वपूर्ण कार्य
स्क्रूटनी प्रक्रिया प्रभावित
कई छात्र विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हुए हैं और अपने अंकों की पुनः जांच के लिए स्क्रूटनी का आवेदन कर चुके हैं। लेकिन मूल्यांकन केंद्रों से उत्तर पुस्तिकाएं नहीं आने के कारण प्रक्रिया रुकी हुई है।
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वेरिफिकेशन का कार्य बाधित
प्रतिदिन सैकड़ों छात्र प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए JAC पहुंच रहे हैं, लेकिन संबंधित कार्य नहीं होने से उन्हें निराश लौटना पड़ रहा है।
विशेष परीक्षाओं का काम रुका
कक्षा 8, 9 और 11 की विशेष परीक्षाओं से जुड़े कार्य भी प्रभावित बताए जा रहे हैं।
प्रमाणपत्र वितरण में देरी
मोर्चा का दावा है कि 6 लाख से अधिक छात्रों की मार्कशीट, प्रोविजनल सर्टिफिकेट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट अब तक संबंधित संस्थानों तक नहीं पहुंच पाए हैं।
विद्यालयों की मान्यता प्रक्रिया प्रभावित
इंटर कॉलेज, उच्च विद्यालय, संस्कृत विद्यालय और मदरसा विद्यालयों की प्रस्वीकृति (मान्यता) संबंधी कार्य भी सचिव के अभाव में रुके हुए हैं। विभिन्न समितियों की बैठकें भी आयोजित नहीं हो पा रही हैं।
मोर्चा ने सरकार पर साधा निशाना
वित्तरहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा की बैठक फजलुल कदीर अहमद की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि लाखों छात्रों और शिक्षकों के हित प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन सरकार और विभाग इस दिशा में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
मोर्चा ने आरोप लगाया कि JAC के अधिकांश कार्य ठप पड़े हैं और राज्यभर के छात्र, अभिभावक तथा शिक्षक परेशान हैं।
बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय
- तीन दिनों के भीतर सचिव की नियुक्ति नहीं होने पर 16 जून को झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी।
- 12 जून को सर्वोदय बाल निकेतन उच्च विद्यालय, धुर्वा में राज्यभर के प्राचार्यों, प्रधानाचार्यों और शिक्षक प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई गई है।
- बैठक में नई शिक्षा नीति 2020 की नियमावली, 75 प्रतिशत अनुदान वृद्धि, अपीलीय अभ्यावेदन और सचिव नियुक्ति के मुद्दे पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
मोर्चा ने स्पष्ट किया कि छात्रों और शिक्षकों की उपेक्षा किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
