झारखंड में सरकारी स्कूलों की बदहाली पर बाबूलाल मरांडी का हमला, कहा– ‘सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ सिर्फ दिखावा
प्रमुख बिंदु:
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने उठाए सवाल
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जर्जर स्कूलों की सच्चाई से ध्यान भटकाने का आरोप
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बच्चों की जान जोखिम में, स्कूल भवन और रास्ते दोनों खतरनाक
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गरीब, दलित, आदिवासी बच्चों के भविष्य को बताया अंधकारमय
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर उठाया मुद्दा
रांची, 17 जुलाई 2025- झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में सरकारी स्कूलों की भयावह स्थिति को लेकर हेमंत सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर साझा एक बयान में मरांडी ने कहा है कि राज्य सरकार महज गिने-चुने ‘सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ का ढिंढोरा पीटकर हजारों जर्जर स्कूलों की सच्चाई से जनता का ध्यान भटका रही है।
“भ्रष्टाचार में लिप्त सरकार से शिक्षा सुधार की उम्मीद बेमानी”
मरांडी ने आरोप लगाया कि जब सरकार का असली मकसद भ्रष्टाचार कर अवैध धन अर्जित करना हो, तो ऐसी व्यवस्था से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उम्मीद करना व्यर्थ है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के नाम पर योजनाएं बनती हैं, घोषणाएं होती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं बदलता।
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सड़कें खस्ताहाल, स्कूल भवन खतरे में
भाजपा नेता ने कहा कि गांवों और दूरदराज़ इलाकों में स्थित स्कूलों तक पहुंचने वाली सड़कें इतनी खराब हैं कि छोटे-छोटे बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचते हैं। वहां भी जर्जर भवनों में पढ़ाई करना उनकी सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है। कई जगहों पर स्कूलों की छतें टूट रही हैं और टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं।
“विकास की रोशनी सिर्फ सत्ताधारी नेताओं के बच्चों तक”
मरांडी ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में विकास की रोशनी केवल मुख्यमंत्री, मंत्रियों और सत्ता से जुड़े चहेते लोगों के बच्चों तक ही सीमित रह गई है। जबकि गरीब, दलित और आदिवासी समाज के बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है।
राज्य सरकार से ईमानदार सुधार की मांग
बाबूलाल मरांडी ने सरकार से मांग की है कि वह शिक्षा को अपने भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाने से बचे और ईमानदारी से शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की दिशा में ठोस कदम उठाए। उन्होंने कहा कि यदि राज्य के हर बच्चे को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं दी गई, तो झारखंड का भविष्य अधर में रहेगा।
राजनीतिक हमले की अगली कड़ी?
बाबूलाल मरांडी का यह बयान राज्य सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की एक और कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। झारखंड में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है और शिक्षा जैसे ज्वलंत मुद्दे पर भाजपा का यह हमला हेमंत सरकार के लिए चुनौती बन सकता है।
