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मनरेगा पर झारखंड का हमला: “बकाया दो, मजदूरी बढ़ाओ या जवाब दो”

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रांची/नई दिल्ली:
झारखंड सरकार ने एक बार फिर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को लेकर केंद्र सरकार के सामने अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है। शनिवार शाम केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस (VC) में झारखंड की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने राज्य के हितों से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए। इस बैठक में देश के लगभग सभी राज्यों के ग्रामीण विकास मंत्रियों ने हिस्सा लिया और मनरेगा की मौजूदा स्थिति तथा भविष्य को लेकर अपने-अपने सुझाव रखे।

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बकाया भुगतान का मुद्दा सबसे अहम

झारखंड की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बैठक में सबसे पहले राज्य में लंबित भुगतान का मुद्दा उठाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि राज्य को मनरेगा के तहत बड़ी राशि अब तक नहीं मिली है, जिससे योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर असर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि झारखंड में:

  • मैटीरियल मद का करीब 950 करोड़ रुपये
  • मजदूरी मद का लगभग 300 करोड़ रुपये
  • प्रशासनिक मद का 36 करोड़ रुपये

लंबित है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि इन बकाया राशियों का जल्द से जल्द भुगतान होना जरूरी है, ताकि योजना को सुचारु रूप से चलाया जा सके।

उन्होंने यह भी बताया कि भुगतान में देरी के कारण पंचायत स्तर पर विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और कई परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं।

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मजदूरों में बढ़ रही निराशा और उदासीनता

दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि लंबे समय से मजदूरी का भुगतान नहीं होने के कारण ग्रामीण मजदूरों में निराशा और उदासीनता बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल एक रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाला एक महत्वपूर्ण माध्यम है। लेकिन जब मजदूरों को समय पर मजदूरी नहीं मिलती, तो उनका भरोसा इस योजना से उठने लगता है।

इसका सीधा असर यह हो रहा है कि मजदूर मनरेगा के कार्यों में रुचि कम दिखा रहे हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी घट रहे हैं।

मजदूरी दर बढ़ाने की मांग तेज

बैठक में मंत्री ने मनरेगा के मजदूरी दर को बढ़ाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई। उन्होंने कहा कि वर्तमान मजदूरी दर बढ़ती महंगाई के हिसाब से पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने इसे “समय की न्यायसंगत मांग” बताते हुए कहा कि मजदूरों को सम्मानजनक जीवन के लिए उचित पारिश्रमिक मिलना जरूरी है।

दीपिका पांडेय सिंह ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर लगभग सभी राज्यों की सहमति है और केंद्र सरकार को इसे प्राथमिकता के आधार पर लागू करना चाहिए।

‘विकसित भारत जी ग्राम जी योजना’ पर आपत्ति

बैठक में पहली बार चर्चा में आई विकसित भारत जी ग्राम जी योजना को लेकर भी झारखंड ने गंभीर आपत्तियां जताईं।

मंत्री ने कहा कि इस योजना को लागू करने से पहले राज्यों के साथ पर्याप्त चर्चा नहीं की गई, जो कि एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया होनी चाहिए थी।

उन्होंने विशेष रूप से योजना में राज्यों की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी के प्रावधान पर चिंता जताई। उनके अनुसार, यह प्रावधान झारखंड जैसे संसाधन सीमित राज्यों के लिए वित्तीय संकट को और बढ़ा सकता है।

मनरेगा को जारी रखने का प्रस्ताव

दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि झारखंड विधानसभा ने मनरेगा को जारी रखने के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया है।

उन्होंने कहा कि मनरेगा राज्य के ग्रामीण इलाकों में रोजगार और आजीविका का प्रमुख साधन है। ऐसे में इसे कमजोर करने या किसी अन्य योजना से प्रतिस्थापित करने का कोई भी प्रयास राज्य के हित में नहीं होगा।

100 दिन से बढ़ाकर 150 दिन रोजगार की मांग

मंत्री ने रोजगार गारंटी की अवधि बढ़ाने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मनरेगा के तहत 100 दिनों की रोजगार गारंटी दी जाती है, जिसे बढ़ाकर 150 दिन किया जाना चाहिए।

उन्होंने तर्क दिया कि इससे ग्रामीण परिवारों को अधिक स्थिर आय मिलेगी और पलायन की समस्या को भी काफी हद तक रोका जा सकेगा।

60 दिनों के अवकाश नियम में छूट की मांग

दीपिका पांडेय सिंह ने 60 दिनों के अवकाश से जुड़े नियमों में भी संशोधन की मांग की। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रावधान मजदूरों के लिए व्यवहारिक नहीं हैं और इससे रोजगार के अवसर सीमित हो रहे हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इन नियमों में लचीलापन नहीं लाया गया, तो ग्रामीण मजदूरों के सामने रोजगार का संकट और गहरा सकता है और पलायन का दबाव भी बढ़ेगा।

केंद्र से त्वरित हस्तक्षेप की अपील

बैठक के अंत में झारखंड की मंत्री ने केंद्र सरकार से अपील की कि राज्य के हिस्से की बकाया राशि का भुगतान जल्द किया जाए और मजदूरों के हित में आवश्यक सुधार किए जाएं।

उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम को मजबूत करना समय की जरूरत है, ताकि ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को स्थिर और सशक्त बनाया जा सके।

झारखंड ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मनरेगा को कमजोर करने के बजाय इसे और प्रभावी बनाने के पक्ष में है, और इसके लिए केंद्र से सहयोग की अपेक्षा करता है।

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