चुनावी माहौल के बीच बंगाल पहुंचे हेमंत सोरेन
पांच राज्यों में जारी चुनावी हलचल के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री और झामुमो अध्यक्ष हेमंत सोरेन पश्चिम बंगाल में प्रचार अभियान शुरू करने जा रहे हैं। 18 से 20 अप्रैल तक चलने वाले इस दौरे में वे तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पक्ष में कई जनसभाओं को संबोधित करेंगे। असम के बाद अब बंगाल में भी ‘सोरेन फैक्टर’ के जरिए भाजपा को घेरने की रणनीति बनाई गई है।
पहले दिन पुरुलिया में तीन बड़ी रैलियां
हेमंत सोरेन शनिवार को रांची से हेलीकॉप्टर द्वारा पुरुलिया पहुंचेंगे। उनके पहले दिन के कार्यक्रम में काशीपुर समेत तीन विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाएं तय हैं। दिनभर प्रचार करने के बाद वे शाम को रांची लौटेंगे।
अगले दो दिन इन जिलों पर फोकस
दौरे के दूसरे और तीसरे दिन उनका फोकस बांकुड़ा, मिदनापुर और झाड़ग्राम जैसे अहम जिलों पर रहेगा। इन इलाकों में चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है और यहां आदिवासी वोट निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
TMC को बिना शर्त समर्थन, नहीं उतारे प्रत्याशी
इस बार झामुमो ने पश्चिम बंगाल चुनाव में अपने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं। पार्टी ने विपक्षी एकजुटता दिखाते हुए ममता बनर्जी को समर्थन दिया है।
झामुमो महासचिव विनोद पांडेय के मुताबिक, इस अभियान में कल्पना सोरेन भी स्टार प्रचारक के तौर पर सक्रिय रहेंगी।
आदिवासी क्षेत्रों पर खास नजर
पुरुलिया, झाड़ग्राम जैसे सीमावर्ती जिलों में संथाल और अन्य आदिवासी समुदायों की बड़ी आबादी है। इन क्षेत्रों में झामुमो का पारंपरिक प्रभाव रहा है, जिसे TMC के पक्ष में ट्रांसफर करने की कोशिश की जा रही है।
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क्या है ‘सोरेन फैक्टर’?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हेमंत सोरेन की मौजूदगी आदिवासी वोटों को प्रभावित कर सकती है। इससे न सिर्फ TMC को फायदा मिल सकता है, बल्कि भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता का मजबूत संदेश भी जाएगा।
