कैबिनेट मंत्री दीपक बिरुवा का भावुक पत्र वायरल, पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन पर साधा निशाना — “जमीर को मार दिया पद और पुत्र के लिए”
रांची | न्यूज़ मॉनिटर
झारखंड की राजनीति में घाटशिला विधानसभा उपचुनाव को लेकर माहौल तेजी से गरमा रहा है। इस बीच राज्य के कैबिनेट मंत्री दीपक बिरुवा द्वारा लिखा गया एक भावुक पत्र सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। यह पत्र उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन को संबोधित करते हुए लिखा है, जिसमें उन्होंने तीखे शब्दों में चंपाई सोरेन के हालिया राजनीतिक रुख पर सवाल उठाए हैं।
“आपने अपनी जमीर को मार दिया पद और पुत्र के लिए” — दीपक बिरुवा
दीपक बिरुवा ने अपने पत्र की शुरुआत “दादा जोहार” संबोधन से की है।
उन्होंने लिखा —
> “आपकी व्याकुलता आपकी व्यथा खुद बता रही है। जीवन में आपसे बहुत कुछ सीखा, लेकिन आप खुद की जमीर को मारकर सिर्फ पद और पुत्र के लिए अपने राजनीतिक अस्तित्व के अंत की ओर अग्रसर हो गए, जो हम सभी कभी सोच भी नहीं सकते।”
मंत्री बिरुवा ने आगे लिखा कि चंपाई सोरेन की मजबूरी सिर्फ झामुमो (JMM) परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा झारखंड परिवार जानता है।
उन्होंने कहा —
> “आप सदैव सम्माननीय रहेंगे, लेकिन जनता आपको मौकापरस्त ही कहेगी। आपको अनुकंपा पर नहीं, बल्कि अरमानों से मुख्यमंत्री बनाया गया था, लेकिन आप उस मर्यादा का पालन नहीं कर सके।”
घाटशिला उपचुनाव पर सीधा बयान — “बाबूलाल की हार तय”
पत्र के अगले हिस्से में दीपक बिरुवा ने घाटशिला उपचुनाव को लेकर भी तीखा रुख अपनाया।
उन्होंने लिखा —
> “अब रही बात घाटशिला विधानसभा उपचुनाव की, तो आपको स्पष्ट बता दूं — बहुत बड़ी हार बाबूलाल की कर रही है इंतजार।”
मंत्री ने आगे लिखा कि भाजपा के तीन पूर्व मुख्यमंत्री कोल्हान में अपनी राजनीतिक पारी के आखिरी पड़ाव पर हैं, और यह बात 14 नवंबर को स्वतः प्रमाणित हो जाएगी।
“जनता को समर्पित रामदास दादा की चिट्ठी” का उल्लेख
पत्र के अंत में दीपक बिरुवा ने लिखा —
> “आपको साधुवाद। जनता को समर्पित स्वर्गीय रामदास दादा की चिट्ठी और आपके कृतज्ञता व सम्मान की कुछ पुरानी तस्वीरें सब कुछ कह जाती हैं।”
राजनीतिक हलचल तेज़
दीपक बिरुवा के इस पत्र ने झारखंड के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
जहां एक ओर झामुमो समर्थक इस पत्र को “सत्य की अभिव्यक्ति” बता रहे हैं, वहीं भाजपा खेमे में इसे “राजनीतिक हताशा” करार दिया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि घाटशिला उपचुनाव न केवल झामुमो बल्कि पूरे कोल्हान की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
