JPSC विवाद: BJP ने हेमंत सरकार पर बोला हमला, सभी भर्ती परीक्षाओं की CBI जांच और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
मुख्य बातें
- भाजपा ने हेमंत सरकार के कार्यकाल की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की CBI जांच की मांग की।
- प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई।
- JPSC के सभी सदस्यों को हटाकर नई नियुक्तियां करने की मांग।
- CID जांच की निष्पक्षता पर सवाल, पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते की गिरफ्तारी नहीं होने पर उठाए प्रश्न।
- कांग्रेस पर भी साधा निशाना, JPSC मामले में चुप्पी पर सवाल।
JPSC विवाद पर भाजपा का बड़ा हमला
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े विवाद को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हेमंत सोरेन सरकार पर बड़ा हमला बोला है। भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने आरोप लगाया कि सरकार के साढ़े छह वर्षों का कार्यकाल युवाओं के सपनों, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और भर्ती घोटालों के लिए याद किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जिस सरकार ने युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था, उसी के कार्यकाल में भर्ती परीक्षाओं पर पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठे हैं। हालांकि, इन आरोपों पर राज्य सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की CBI जांच की मांग
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि भाजपा की मांग है कि हेमंत सोरेन सरकार के कार्यकाल में आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की CBI से जांच कराई जाए। उनके अनुसार, इससे भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े सभी विवादों की निष्पक्ष जांच संभव होगी।
उन्होंने यह भी मांग की कि राज्य के शिक्षा मंत्री, जिनके पास मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ही यह विभाग संभाल रहे हैं, नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा दें।
JPSC आयोग के पुनर्गठन की मांग
भाजपा नेता ने कहा कि जब पूरे आयोग पर गंभीर आरोप लगे हैं, तब केवल कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। उन्होंने मांग की कि JPSC के सभी सदस्यों को हटाकर पारदर्शी प्रक्रिया के तहत नई नियुक्तियां की जाएं, ताकि आयोग की विश्वसनीयता बहाल हो सके।
CID जांच की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
प्रतुल शाहदेव ने JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि गंभीर आरोप सामने आने के बावजूद उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई, जिससे CID जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने दावा किया कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई करने से पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आएगी। हालांकि, यह भाजपा का राजनीतिक आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
निजी एजेंसी की भूमिका पर संवैधानिक सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान प्रतुल शाहदेव ने दावा किया कि झारखंड लोक सेवा आयोग (प्रक्रिया) नियमावली, 2002 तथा संविधान के अनुच्छेद 315, 316 और 320 के अनुसार आयोग के मूल कार्यों को किसी निजी एजेंसी को नहीं सौंपा जा सकता।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि परीक्षा संचालन, मूल्यांकन, मेरिट सूची तैयार करने या अंतिम चयन जैसे कार्य निजी एजेंसियों को दिए गए हैं, तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि संवैधानिक व्यवस्था के विपरीत है। हालांकि, उन्होंने इस संबंध में किसी आधिकारिक जांच रिपोर्ट या न्यायिक निष्कर्ष का हवाला नहीं दिया।
कांग्रेस की चुप्पी पर भी भाजपा का हमला
प्रतुल शाहदेव ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी का दोहरा राजनीतिक रवैया सामने आ गया है। उन्होंने सवाल किया कि दिल्ली में युवाओं के मुद्दे उठाने वाली कांग्रेस झारखंड में JPSC विवाद पर चुप क्यों है।
उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व और पार्टी के उन नेताओं का भी उल्लेख किया जिनका नाम JPSC से जुड़ी चर्चाओं में सामने आया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है।
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प्रेस वार्ता में ये नेता रहे मौजूद
भाजपा की इस प्रेस वार्ता में प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव के साथ प्रदेश के सह मीडिया प्रभारी अजय राय भी मौजूद रहे।
क्या है मामला?
JPSC भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा संचालन को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार विवाद और जांच की मांग उठ रही है। विभिन्न छात्र संगठन, राजनीतिक दल और अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। इसी बीच भाजपा ने पूरे मामले की CBI जांच की मांग करते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि सरकार की ओर से जांच एजेंसियों के माध्यम से कार्रवाई जारी होने की बात कही जाती रही है।
