JTET 2026 Jharkhand JTET controversy

“भाषा पर सियासत! JTET में मगही-अंगिका हटाने पर RJD का हमला”

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JTET में भाषा पर बवाल! भोजपुरी, मगही और अंगिका OUT… झारखंड में सियासी संग्राम तेज

मुख्य बिंदु 

  • 10 साल बाद हो रही JTET परीक्षा, लेकिन शुरू होते ही विवाद
  • भोजपुरी, मगही और अंगिका को परीक्षा से बाहर रखने पर विरोध
  • सत्ताधारी गठबंधन की पार्टी RJD ने उठाए सवाल
  • सरकार पर भाषाई भेदभाव के आरोप

JTET से पहले ही बड़ा विवाद

झारखंड में करीब एक दशक के लंबे इंतजार के बाद JTET (झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा) होने जा रही है। लेकिन परीक्षा शुरू होने से पहले ही भाषा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है

इस बार JTET में उर्दू को शामिल किया गया है, जबकि भोजपुरी, मगही और अंगिका जैसी क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल नहीं किया गया, जिससे राज्य की राजनीति गरमा गई है।

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RJD का सीधा हमला: ‘समाज में अलगाव बढ़ेगा’

इस फैसले का विरोध करते हुए सत्ताधारी गठबंधन की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सरकार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पार्टी की ओर से कैलाश यादव ने कहा कि—
भोजपुरी, मगही और अंगिका को बाहर रखना समाज में अलगाव पैदा करेगा

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि झारखंड में पहले भी भाषा को लेकर विवाद हो चुका है, ऐसे में सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए।

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CM हेमंत सोरेन से सीधा हस्तक्षेप की मांग

RJD ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की है कि
इस भाषाई विवाद को तुरंत खत्म किया जाए
और JTET परीक्षा में भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल किया जाए

इस मांग के बाद अब यह मामला सिर्फ शिक्षा का नहीं, बल्कि सीधे राजनीतिक दबाव का मुद्दा बनता जा रहा है

सत्ता के अंदर ही मतभेद, बढ़ी राजनीतिक गर्मी

इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी बात यह है कि
 विरोध विपक्ष से नहीं, बल्कि सत्ता के अंदर से उठ रहा है

यानी गठबंधन सरकार के भीतर ही मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं, जिससे आने वाले समय में यह मुद्दा और भी बड़ा रूप ले सकता है।

 छात्रों पर असर या सियासत का खेल?

अब बड़ा सवाल यही है—

  • क्या यह फैसला प्रशासनिक कारणों से लिया गया?
  • या फिर यह भाषाई संतुलन बिगाड़ने वाला कदम है?
  • क्या क्षेत्रीय भाषाओं को नजरअंदाज कर दिया गया?

क्योंकि झारखंड में बड़ी संख्या में लोग
भोजपुरी, मगही और अंगिका बोलते हैं, ऐसे में इन भाषाओं को बाहर रखना कई सवाल खड़े करता है।

निष्कर्ष: JTET बना नया सियासी मुद्दा

JTET जैसी अहम परीक्षा अब भाषा और राजनीति के बीच फंसती नजर आ रही है

एक तरफ सरकार का फैसला
 दूसरी तरफ गठबंधन के अंदर से ही विरोध

अब देखना होगा कि
 सरकार इस विवाद को कैसे सुलझाती है
 और क्या इन भाषाओं को फिर से शामिल किया जाएगा

आपकी राय? 

क्या JTET में भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल किया जाना चाहिए?
अपनी राय कमेंट में जरूर दें।

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