“ड्यूटी पर मौत से जंग!” — कांके में विद्युतकर्मी हादसे से मचा बवाल, श्रमिक संघ का अल्टीमेटम
मुख्य बिंदु
- कांके सबडिवीजन में कार्यरत विद्युतकर्मी गंभीर हादसे का शिकार
- मो. शमी आलम की हालत नाजुक, रांची के अस्पताल में इलाज जारी
- श्रमिक संघ ने विभाग पर लगाया लापरवाही का आरोप
- उच्चस्तरीय जांच और मुआवजे की मांग
- कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
कांके में बड़ा हादसा, विद्युतकर्मी जिंदगी और मौत के बीच
रांची के कांके सबडिवीजन में एक गंभीर दुर्घटना ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, विद्युतकर्मी मो. शमी आलम कार्य के दौरान हादसे का शिकार हो गए, जिसके बाद उनकी स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है।
फिलहाल उनका इलाज रांची स्थित देवकमल हॉस्पिटल में चल रहा है, जहां वे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। इस घटना ने पूरे श्रमिक वर्ग में आक्रोश पैदा कर दिया है।
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“सुरक्षा में लापरवाही!” — श्रमिक संघ का बड़ा आरोप
झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ के अध्यक्ष अजय राय ने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए इसे विभागीय लापरवाही का परिणाम बताया है।
उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में इस तरह की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जो यह साफ संकेत देती है कि कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी की जा रही है। ऐसे में विद्युतकर्मियों की जान खतरे में पड़ गई है।
आउटसोर्सिंग कर्मी होने से बढ़ी चिंता
बताया गया कि घायल कर्मी मो. शमी आलम जेएमडी एजेंसी के माध्यम से आउटसोर्सिंग पर कार्यरत थे। ऐसे में श्रमिक संघ ने सवाल उठाया है कि क्या आउटसोर्सिंग कर्मियों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था है या नहीं।
संघ का कहना है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच जरूरी है, ताकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सके।
संघ ने रखी 5 बड़ी मांगें
श्रमिक संघ ने महाप्रबंधक (तकनीकी), विद्युत आपूर्ति क्षेत्र, रांची को ज्ञापन सौंपते हुए कई अहम मांगें रखी हैं—
- दुर्घटना की उच्चस्तरीय जांच समिति का तत्काल गठन
- दोषी अधिकारियों और एजेंसी पर सख्त कार्रवाई
- घायल कर्मी के लिए पूर्णतः निःशुल्क और बेहतर इलाज
- पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता और उचित मुआवजा
- भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त सुरक्षा नियम लागू
“कार्रवाई नहीं तो आंदोलन!” — श्रमिक संघ की चेतावनी
अजय राय ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर इस मामले में जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो श्रमिक संघ आंदोलन के लिए मजबूर होगा।
उन्होंने कहा कि इस स्थिति की पूरी जिम्मेदारी विभाग की होगी, क्योंकि कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
निष्कर्ष: सुरक्षा बनाम लापरवाही का बड़ा सवाल
यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर खामियों को उजागर करती है। एक तरफ कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है।
अब देखना यह होगा कि विभाग इस मामले में कितनी तेजी और गंभीरता से कदम उठाता है।
