Birsa Samadhi land dispute

‘राजेश कच्छप और अजय तिर्की के बयान ने भड़काया सरना समाज का गुस्सा’

झारखंड/बिहार ताज़ा ख़बर विधानसभा चुनाव

धार्मिक सरना झंडा विवाद को लेकर आदिवासी संगठनों की आपात बैठक, दो दिन में माफी नहीं तो होगा जोरदार आंदोलन

मुख्य बिंदु:

  • करम टोली स्थित धुमकुड़िया भवन में हुई आदिवासी संगठनों की बैठक

  • विधायक राजेश कच्छप और अजय तिर्की के बयान पर गहरा रोष

  • बयान वापस नहीं लेने पर दो दिन के भीतर आंदोलन की चेतावनी

  • ईसाई धर्म में धर्मांतरित लोगों द्वारा सरना झंडा उपयोग पर आपत्ति

  • समाधि स्थल की जमीन की जांच की मांग



रांची, 2 अगस्त 2025- रांची के करम टोली स्थित धुमकुड़िया भवन में आज विभिन्न आदिवासी संगठनों एवं सरना बुद्धिजीवियों की एक आपात बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य लालपुर मौजा स्थित बिरसा समाधि स्थल के पीछे धार्मिक सरना झंडा गाड़ने और उसके बाद उत्पन्न विवाद पर मंथन करना था।

Birsa Samadhi land dispute
सारना झंडा विवाद पर आंदोलन की चेतावनी

बैठक में मौजूद सामाजिक अगुवाओं और बुद्धिजीवियों ने विधायक राजेश कच्छप और केंद्रीय सरना समिति के स्वयंभू अध्यक्ष अजय तिर्की के विवादित बयान की कड़ी आलोचना की। वक्ताओं ने कहा कि दोनों नेताओं द्वारा यह कहना कि “धार्मिक सरना झंडे का उपयोग जमीन बचाने के लिए किसी भी धर्म – हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई – द्वारा किया जा सकता है” अत्यंत आपत्तिजनक है।

सरना समाज आहत, आंदोलन की चेतावनी

बैठक में उपस्थित सभी लोगों ने एकमत से कहा कि उक्त बयान ने सरना धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है। वक्ताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि विधायक राजेश कच्छप और अजय तिर्की ने अगले दो दिनों के भीतर अपना बयान वापस नहीं लिया, तो आक्रोशित सरना अनुयायी सड़कों पर उतरकर जोरदार आंदोलन करेंगे।

ईसाई धर्मांतरितों पर भी जताई आपत्ति

वक्ताओं ने यह भी कहा कि जो लोग ईसाई धर्म में धर्मांतरित हो चुके हैं, उन्हें सरना झंडे का उपयोग करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि सरना धर्म को मानने वाले लोगों की धार्मिक पहचान और आस्था का प्रतीक यह झंडा है और इसका दुरुपयोग किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही ईसाई समुदाय के लोगों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई।

समाधि स्थल की जमीन की जांच की मांग

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि बिरसा समाधि स्थल के पीछे की जमीन का मालिकाना हक स्पष्ट करने के लिए सरना समाज के लोग स्वयं जांच करेंगे। वक्ताओं ने दोहराया कि इस मुद्दे पर दूध का दूध और पानी का पानी कर सच्चाई सामने लाई जाएगी।

बैठक में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी

इस महत्वपूर्ण बैठक में लक्ष्मी नारायण मुंडा, भुनेश्वर लोहरा, फूलचंद तिर्की, अमर तिर्की, डब्लू मुंडा, निरंजना हेरेंज टोप्पो, कुंदरसी मुंडा, निर्मला मुंडा, मेवा लकड़ा, सुमी कच्छप, मंगलदानी मिंज सहित कई प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और सैकड़ों की संख्या में सरना धर्मावलंबी उपस्थित थे।

बैठक के अंत में सभी ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि सरना धर्म की अस्मिता, पहचान और सम्मान की रक्षा के लिए किसी भी हद तक संघर्ष किया जाएगा। साथ ही सभी संगठनों ने यह भी तय किया कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर एक बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा यदि समय रहते विवादित बयान वापस नहीं लिया गया।

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