डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट्स विभाग में छात्रों का विस्फोट: आजसू छात्र संघ और झारखंड छात्र मोर्चा का आर-पार आंदोलन
मुख्य बिंदु:
- फाइन आर्ट्स विभाग में संसाधनों की भारी कमी और प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ छात्रों का आक्रोश
- आजसू छात्र संघ और झारखंड छात्र मोर्चा के नेतृत्व में ऐतिहासिक प्रदर्शन
- छात्रों ने कुलसचिव, DSW और विभाग समन्वयक को मौके पर बुलाकर पूछे तीखे सवाल
- एक सप्ताह का अल्टीमेटम, वरना AC-पंखा-बाथरूम तक ठप करने की चेतावनी
- “अब चुप्पी नहीं – क्रांति होगी!” का नारा
रांची, 22 अप्रैल 2025 — झारखंड की राजधानी रांची स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) एक बार फिर छात्र आंदोलन की आग में जल उठा। विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग (Fine Arts) में लगातार उपेक्षा और अव्यवस्था के खिलाफ आज आजसू छात्र संघ और झारखंड छात्र मोर्चा के नेतृत्व में छात्रों ने ज़बरदस्त प्रदर्शन किया। वर्षों की अनदेखी और बदहाल स्थिति से परेशान छात्रों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा।

छात्रों ने सीधे कुलसचिव, विभाग समन्वयक और DSW को विभाग में बुलाया और खुलकर जवाब-तलब किया। आंदोलन में शामिल छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि विभाग की दशा नहीं सुधारी गई, तो पूरे विश्वविद्यालय में बड़ा जनांदोलन छेड़ा जाएगा।
संसाधनों की कमी और लापरवाह प्रशासन के खिलाफ फूटा गुस्सा
छात्रों का कहना है कि फाइन आर्ट्स विभाग में न तो ज़रूरी उपकरण हैं और न ही बुनियादी सुविधाएं। क्लासरूम की हालत जर्जर है, बैठने की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। विभागीय शिक्षकों पर कक्षाएं नियमित रूप से न लेने और मूल्यांकन में अनियमितता के गंभीर आरोप लगे हैं।
छात्रों ने कहा कि जब एक क्रिएटिव और प्रैक्टिकल विषय में पढ़ाई के लिए बुनियादी संसाधन तक उपलब्ध नहीं हैं, तो पढ़ाई का क्या औचित्य रह जाता है?

आजसू छात्र संघ का नेतृत्व, सख्त चेतावनी
इस आंदोलन की अगुवाई आजसू छात्र संघ के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बबलू महतो ने की। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम देते हुए कहा:
“अगर 7 दिन के भीतर विभाग की स्थिति नहीं सुधारी गई, तो हम विश्वविद्यालय के हर अधिकारी की ठंडी हवा बंद कर देंगे। जब हमारे फाइन आर्ट्स के छात्र बिना पंखा और बिना संसाधनों के पढ़ सकते हैं, तो अफसर भी उसी हालात में काम करें।”
बबलू महतो ने यह भी कहा कि यह कोई सांकेतिक विरोध नहीं, बल्कि वर्षों से दबे आक्रोश की शुरुआत है।
प्रमुख मांगे जिन पर छात्रों ने उठाई आवाज़
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संसाधनों की कमी – रंग, ब्रश, मॉडलिंग मटेरियल, ड्रॉइंग टेबल आदि का घोर अभाव
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शिक्षकों की लापरवाही – समय पर कक्षाएं न लेना, छात्रों की उपेक्षा
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मूल्यांकन में गड़बड़ी – प्रैक्टिकल और इंटरनल एसेसमेंट में पारदर्शिता का अभाव
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बुनियादी ढांचा बदहाल – बैठने, पंखे, रोशनी जैसी प्राथमिक सुविधाओं का भी टोटा
आंदोलन में छात्रों की बड़ी भागीदारी
प्रदर्शन में सैकड़ों छात्र-छात्राएं शामिल हुए। आंदोलन स्थल पर कमलेश महतो, रवि रौशन सहित छात्र मोर्चा और आजसू छात्र संघ के कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर उनकी समस्याओं को अनदेखा किया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
“अब चुप्पी नहीं, आर-पार की लड़ाई होगी!”
आंदोलन के समापन पर छात्रों ने एक स्वर में नारा लगाया:
“अब चुप्पी नहीं, क्रांति होगी! अन्याय के खिलाफ अब आर-पार की टक्कर होगी!”
छात्रों का यह आंदोलन न सिर्फ फाइन आर्ट्स विभाग की दुर्दशा को उजागर करता है, बल्कि विश्वविद्यालय में प्रशासनिक संवेदनहीनता और अकादमिक उपेक्षा की एक बड़ी तस्वीर भी सामने लाता है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया?
इस मुद्दे पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, छात्रों की चेतावनी और एक सप्ताह का अल्टीमेटम प्रशासन के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि अब अनदेखी करना भारी पड़ सकता है।
