झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन नहीं रहे, पार्टी ने कहा– आदिवासी समाज के लिए ‘हिमालय स्खलन’
मुख्य बिंदु:
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जेएमएम के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर पार्टी ने जताया गहरा शोक
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महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य बोले– यह आदिवासी समाज के लिए ‘हिमालय स्खलन’
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गुरुजी का जीवन संघर्ष और न्याय की मिसाल रहा
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शिक्षा, संघर्ष और सम्मान की राह दिखाने वाले थे गुरुजी
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पार्टी ने कहा– शारीरिक रूप से नहीं रहे, पर विचारों में हमेशा रहेंगे
रांची, 04 अगस्त 2025- झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक संरक्षक और झारखंड आंदोलन के प्रणेता आदरणीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर पार्टी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। पार्टी के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने इसे “आदिवासी-मूलवासी, शोषित, दलित, मजदूर, किसान और महिला समुदाय के लिए हिमालय स्खलन” करार दिया है।
पार्टी द्वारा जारी शोक संदेश में कहा गया है कि आदरणीय गुरुजी ने हमेशा धारा के विरुद्ध जाकर संघर्ष किया और कभी भी पराजित नहीं हुए। उनका पूरा जीवन न्याय, अधिकार और पहचान की लड़ाई में बीता। उन्होंने हाशिये पर खड़े समाज को आवाज दी, उन्हें सम्मान और आत्मगौरव दिलाया।
“गुरुजी ने हमेशा शिक्षा को अज्ञानता के विरुद्ध हथियार बताया। उन्होंने पढ़ाई के जरिए आत्मनिर्भरता और शोषण के विरुद्ध लड़ाई के लिए प्रेरित किया,” – पार्टी ने कहा।
शिबू सोरेन का जीवन एक आंदोलन की तरह रहा। उन्होंने जंगल-जमीन की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी, जल-जंगल-जमीन को निजीकरण से बचाने का संकल्प लिया और आदिवासियों को राजनीतिक चेतना से जोड़ा।
पार्टी ने कहा कि वे अब शारीरिक रूप से हमारे साथ नहीं हैं, लेकिन उनकी शिक्षा, विचार और संघर्ष की भावना हर कार्यकर्ता को विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग रहने की प्रेरणा देती रहेगी।
